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प्रदेश के छह पुराने मेडिकल कॉलेजों को मिलेगी स्वायत्तता

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प्रदेश के छह पुराने मेडिकल
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कॉलेजों को मिलेगी स्वायत्तता
कानपुर को वरीयता, 2020 में औपचारिकताएं होंगी पूरी
एमएलएन मेडिकल कॉलेज भी 2021 में बनेगा इंस्टीट्यूट
बढ़ेंगी सुविधाएं, एम्स की तरह होगा शिक्षकों का वेतन, भत्ते
गोरखपुर, आगरा, मेरठ और झांसी मेडिकल कॉलेज भी होंगे विकसित
प्रयागराज। प्रदेश के कानपुर, प्रयागराज, गोरखपुर, आगरा, मेरठ और झांसी मेडिकल कॉलेज को सरकार स्वायत्तता प्रदान कर इंस्टीट्यूट के रूप में विकसित करेगी। सभी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को मिलने वाली चिकित्सकीय सुविधाएं उच्चीकृत होंगी। शिक्षकों का वेतन और भत्ते एम्स की तर्ज पर दिया जाएगा। कानपुर मेडिकल कॉलेज 2020 तथा अन्य कॉलेजों को 2021 से इंस्टीट्यूट बनाने में क्रमश: वरीयता दी जाएगी।
सूबे के छह पुराने मेडिकल कॉलेजों को इंस्टीट्यूट में बदलते ही स्थानीय स्तर पर प्राचार्य को गवर्निंग बॉडी की बैठक में प्रस्तावों को पारित कराकर निर्णय लेने का अधिकार होगा। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शासन की तरफ न देखना पड़ेगा और न ही अनुमति की दरकार होगी। सभी मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं के लिए एमसीआई के मानक और पाठ्यक्रम के मुताबिक परीक्षाएं कराकर डिग्री बांटेंगे। यही नहीं संबद्ध अस्पतालों में बेहतरी समेत सफाई, सुरक्षा, उपकरणों की मरम्मत आदि का काम खुद करा सकेंगे।
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शिक्षकों की होगी नियुक्ति, संविदा वालों की छुट्टी
मेडिकल कॉलेजों के इंस्टीट्यूट बनते ही पूर्णकालिक शिक्षकों की नियुक्ति का काम बिना लोक सेवा आयोग की अनुमति से किया जा सकेगा। शासन की मंशा है जल्द से जल्द संविदा वाले शिक्षकों की छुट्टी कर दी जाए। शिकायतें हैं कि एमसीआई के मानकों को पूरा करने के लिए कार्यरत ऐसे संविदा शिक्षक कॉलेज का शिक्षण कार्य कम, निजी प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
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कानपुर मेडिकल कॉलेज को जल्द ही स्वायत्तता मिल जाएगी। इसके लिए बिल बनाने का काम चल रहा है। वर्ष 2020 तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद क्रमश: अन्य पांच कॉलेजों को भी आटोनामस इंस्टीट्यूट बनाया जाएगा। - डॉ. रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा
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