सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर श्री पटना साहिब (बिहार) से निकाली जा रही जागृति यात्रा मंगलवार देर शाम यहां पहुंची। फाफामऊ की तरफ से शहर में यात्रा ने प्रवेश किया तो बालसन, सिविल लाइंस और खुल्दाबाद समेत कई स्थानों पर यात्रा और अगुवाई कर रहे पंज प्यारों का स्वागत कर फूल बरसाए।
सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर श्री पटना साहिब (बिहार) से निकाली जा रही जागृति यात्रा मंगलवार देर शाम यहां पहुंची। फाफामऊ की तरफ से शहर में यात्रा ने प्रवेश किया तो बालसन, सिविल लाइंस और खुल्दाबाद समेत कई स्थानों पर यात्रा और अगुवाई कर रहे पंज प्यारों का स्वागत कर फूल बरसाए। यात्रा के गुरु सिंह सभा खुल्दाबाद गुरुद्वारे पहुंचने पर कीर्तन दरबार सजा।
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गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार हरजिंदर सिंह के मुताबिक यात्रा में आए पंज प्यारों के साथ जत्थेदार हरजीत सिंह और अन्य ग्रंथी गुरुद्वारे में रात्रि विश्राम करेंगे। बुधवार सुबह 8:00 से 9:30 बजे तक गुरुद्वारे में कीर्तन दरबार, कथा, अरदास और श्रद्धा समागम होगा। इसके बाद यात्रा सुबह 10 बजे फतेहपुर के रास्ते कानपुर रवाना होगी। यात्रा का स्वागत करने वालों में अध्यक्ष सरदार हरजिंदर सिंह, महामंत्री दिलजीत सिंह, कोषाध्यक्ष मनजीत सिंह माकन, निर्मल सिंह, जसमीत सिंह, इंदरप्रीत सिंह, पतविंदर सिंह, परमजीत सिंह बग्गा, लखविंदर सिंह और सुरेंद्र सिंह पुरी आदि रहे। वहीं बालसन चौराहे पर यात्रा का स्वागत कर शीश नवाने वालों में राणा चावला, पार्षद साहिल अरोरा, अवंतिका टंडन, पल्लवी अरोड़ा, वंदना त्रिपाठी आदि शामिल रहे।
आनंदपुर साहिब रोपड़ में विराम लेगी यात्रा
हरजिंदर सिंह ने बताया कि 17 सितंबर से निकली जागृति यात्रा नवंबर में श्री आनंदपुर साहिब रोपड़ (पंजाब) में विराम लेगी। इसका मकसद लोगों में गुरु तेग बहादुर के अद्वितीय बलिदान, मानवता, धार्मिक सहिष्णुता और सबका धर्म सम्मान के संदेश को जन-जन तक पहुंचना है।
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प्रयागराज में छह माह और नौ दिन तप और ध्यान किया था
सरदार मनमोहन सिंह तन्हा के मुताबिक गुरु तेग बहादुर साहिब ने प्रयागराज में लगभग छह माह और नौ दिन तप और ध्यान किया था। यह स्थान आज गुरुद्वारा पक्की संगत अहियापुर के नाम से जाना जाता है। यह कल्याणी देवी मंदिर के पास है। यह पवित्र स्थल आज भी गुरु तेग बहादुर साहिब की आध्यात्मिक साधना और तपस्या का साक्षी है और सिख धर्म के साथ ही अन्य श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र बना है।