इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा जिले के तीन सेवानिवृत्त कलेक्शन अमीनों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा की गणना में नियमितीकरण से पहले की सीजनल सेवा को भी शामिल किया जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा जिले के तीन सेवानिवृत्त कलेक्शन अमीनों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा की गणना में नियमितीकरण से पहले की सीजनल सेवा को भी शामिल किया जा सकता है। हालांकि, पेंशन की राशि नियमित सेवा अवधि के आधार पर ही तय होगी। न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने राम सनेही एवं दो अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।
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याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 1989 और 1990 में बांदा जिले की सदर, बबेरू और अतर्रा तहसीलों में सीजनल कलेक्शन अमीन के पद पर हुई थी। उनकी सेवाएं क्रमशः 2005 और 2009 में नियमित हुईं। तीनों वर्ष 2019, 2021 और 2022 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद पुरानी पेंशन का लाभ मांगने पर विभाग ने 12 अप्रैल 2023 को उनकी अर्जी खारिज कर दी थी।
विभाग का कहना था कि उन्होंने न्यूनतम अर्हकारी सेवा पूरी नहीं की है। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि नियमितीकरण से पहले की सेवा को भी पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में जोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट ने पूर्व के न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए इस तर्क को स्वीकार किया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने के आठ सप्ताह के भीतर तीनों याचिकाकर्ताओं के सेवानिवृत्ति संबंधी बकाया लाभों की गणना कर भुगतान किया जाए।