136 यात्राओं पर मनमानी पैसा किया गया खर्च
इसके अलावा नियमों के मुताबिक, जो कर्मचारी निजी टैक्सी से यात्रा करने को अधिकृत नहीं थे, उन्हें भी इसकी अनुमति दी गई। इस तरह की 136 यात्राओं का ब्योरा मिला। उन्हें अधिक से अधिक एसी बस से जाने का प्रावधान था। यह भी पाया गया कि अगर कर्मचारी नियमानुसार एसी बस से यात्रा करते तो कुल 136 यात्राओं पर अधिकतम 800 रुपये किराये के हिसाब से 1.08 लाख रुपये का खर्च आता। जबकि निजी टैक्सी से की गई उनकी यात्रा के लिए 7.36 लाख रुपये का भुगतान हुआ। ऐसे में करीब 6.27 लाख रुपये के सरकारी अनुदान का बेजा खर्च किया गया।
आईसीएआर की ग्रांट का भी दुरुपयोग
सूत्रों का कहना है कि शुआट्स में सरकारी अनुदान के अनियमित व्यय का खेल सालों से चल रहा था। 2014-15 मेें हुए जनरल ऑडिट में भी तमाम गड़बड़ी सामने आई थी। इसमें से एक इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) की ओर से दिए गए विकास अनुदान की राशि के अनियमित व्यय से भी संबंधित था। जांच एजेंसी ने पाया था कि आईसीएआर की अनुदान राशि से रायबरेली स्थित एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्य के लिए 19.61 लाख का भुगतान किया गया। यह नियमत: गलत था क्योंकि अनुदान संस्थान के नैनी प्रयागराज स्थित संस्थान के नाम से जारी किया गया था।
जेल में बंद डीन का आज हो सकता है बयान
5.56 करोड़ के गबन के एक आरोपी डीन डॉ. इम्तियाज का बयान नैनी पुलिस आज ले सकती है। दरअसल कोर्ट से इसके लिए अनुमति मिल गई है। नैनी पुलिस फतेहपुर जेल में जाकर उसका बयान दर्ज करेगी। इसके बाद उसके भी खिलाफ चार्जशीट लगाई जा सकती है।