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शुआट्स : विवि में नियुक्ति में अनियमितता मामले मे पूर्व रजिस्ट्रार सर्वजीत हावर्ड सहित दो की याचिका खारिज

Wed, 22 Feb 2023 09:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

वादी मुकदमा पुलिस उपाधीक्षक नवेंद्र कुमार ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई और आरोप लगाया कि कुलपति एवं उनके सहयोगियों ने मिलकर प्रोफेसर पद की नियुक्ति अवैध एवं नियम विरुद्ध तरीके से की है। इन लोगों ने राजकीय धन का आपराधिक दुरुपयोग किया है।
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विस्तार
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जिला न्यायालय ने बुधवार को नैनी थानाक्षेत्र स्थित सैम हिग्गिनबटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर टेक्रालॉजी एंड साइंसेज (शुआट्स) में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंड प्रोफेसर भर्ती मामले के आरोपी पूर्व रजिस्ट्रार सर्वजीत हावर्ड और कार्यालय अधीक्षक अशोक संदीप सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि याचियों को अगर जमानत पर रिहा किया गया तो वे विवेचना में हस्तक्षेप कर सकते हैं। लिहाजा, जमानत अर्जी निरस्त किए जाने योग्य है। यह आदेश सत्र न्यायाधीश संतोष राय ने अभियुक्तों के वकील और शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरि के तर्कों को सुनकर दिया।

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वादी मुकदमा पुलिस उपाधीक्षक नवेंद्र कुमार ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई और आरोप लगाया कि कुलपति एवं उनके सहयोगियों ने मिलकर प्रोफेसर पद की नियुक्ति अवैध एवं नियम विरुद्ध तरीके से की है। इन लोगों ने राजकीय धन का आपराधिक दुरुपयोग किया है। बचाव पक्ष ने दोनों अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए तर्क दिया कि दोनों आरोपियों का नियुक्ति प्रक्रिया में कोई अधिकार नहीं था। उनकी ओर से नियुक्ति पत्र निर्गत नहीं किया गया। जबकि, जिला शासकीय अधिवक्ता अपराध ने इसका विरोध किया।

कहा कि वर्ष 1994 से लेकर वर्ष 2017 के मध्य में कुल 69 प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर पदों की नियुक्ति नियमों की अनदेखी करके की गई है। निर्धारित भर्ती प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया है। इस पर न्यायालय ने दोनों की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।

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शुआट्स में चीफ प्रॉक्टर की नियुक्ति भी जांच के घेरे में
शुआट्स में जिन 69 शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता की बात सामने आई है, उनमें मौजूदा चीफ प्रॉक्टर डॉ. देवराज वडगू भी शामिल हैं। विशेष ऑडिट के दौरान यह बात सामने आई है कि उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से अर्हता तिथि के पहले ही एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति दी गई। यही नहीं अन्य परिणामी लाभ भी दिए गए। यह भी पता चला है कि वह शासन में पदस्थ एक उच्च अधिकारी के भाई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, विशेष ऑडिट के दौरान जांच एजेंसी ने डॉ. वडगू की व्यक्तिगत पत्रावलियाें की समीक्षा की तो कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पता चला कि असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर उनके चयन के समय स्पष्ट रूप से पद उपलब्ध ही नहीं था। आरोप यह भी है कि करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत एसोसिएट प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति के लिए पूर्व सेवाओं का अनियमित लाभ भी दिया गया। इसके चलते निर्धारित समय से पहले ही उन्हें परिणामी लाभाें का भुगतान कर दिया गया।
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