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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद : कारसेवा के एलान पर हाईकोर्ट ने डीएम और एसएसपी से तलब की रिपोर्ट

Sat, 18 Jul 2026 02:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अखाड़ा परिषद व अन्य साधु-संतों की ओर से नौ अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विवादित स्थल पर कारसेवा करने के एलान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के डीएम और एसएसपी से शांति-व्यवस्था को लेकर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट तलब की है।
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मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद। - फोटो : अमर उजाला।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अखाड़ा परिषद व अन्य साधु-संतों की ओर से नौ अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विवादित स्थल पर कारसेवा करने के एलान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के डीएम और एसएसपी से शांति-व्यवस्था को लेकर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट तलब की है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की अदालत ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़े 18 मूल वादों पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है। मूल वाद संख्या चार की वादी संस्था श्री कृष्ण जन्मभूमि निर्माण ट्रस्ट की ओर से अदालत में जन्मभूमि परिसर में शांति व्यवस्था कायम रखने को लेकर अर्जी दाखिल की गईं। मांग की है कि कारसेवा के एलान के मद्देनजर जन्मभूमि परिसर किसी प्रकार के आयोजन और किसी व्यक्ति अथवा समूह के प्रवेश पर रोक लगाई जाए, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो।

कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मथुरा के डीएम और एसएसपी से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करते हुए शांति व्यवस्था की जानकारी देने का आदेश दिया है। अन्य मूल वादों से जुड़े अधिवक्ताओं ने कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मथुरा की जिला अदालत के दोनों पक्षों के बीच चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया की जानकारी दी। बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने लोक अदालत के लिए 21 से 23 अगस्त तक की तारीख नियत की है। हाईकोर्ट विभिन्न मूल वादों में लंबित अर्जियों पर 25 अगस्त को सुनवाई करेगा।
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सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने पूर्व में दाखिल संशोधन अर्जियों में संशोधन से संबंधित एक नया आवेदन और हलफनामा भी दाखिल किया। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रतिवादी पक्ष से आपत्तियां तलब की हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन मूल वाद के साथ विभिन्न पक्षों की कई अंतरिम और विविध अर्जियां लंबित हैं।
इनमें संशोधन आवेदन, स्थगन, दस्तावेजों के संरक्षण एवं निरीक्षण, आधिकारिक भाषा अधिनियम से संबंधित आवेदन, कार्यवाही स्थगित करने, मुद्दों के निर्धारण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, पेन ड्राइव, मूल अभिलेखों तथा अन्य अंतरिम राहतों से जुड़े कई आवेदन शामिल हैं। इन सभी पर मुख्य वाद के साथ उपयुक्त समय पर विचार किया जाएगा।

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