परमार्थ न्यू अरैल घाट पर बुधवार को आयोजित गंगा आरती में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी पत्नी डॉ. प्रियंका मार्डन के साथ शामिल हुए। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के पहल की सराहना करते हुए कहा कि परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में श्री जगन्नाथ मंदिर स्थापित होना उत्तर और पूर्व भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत सेतु है।
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ हमारे ओडिशा की पहचान हैं। हमारा मान है और साथ ही वे संपूर्ण भारत की आत्मा भी हैं। उनकी रथयात्रा हमें संदेश देती है कि ईश्वर स्वयं भक्तों के द्वार आते हैं, भेदभाव मिटाते हैं और सबको अपने प्रेम में समाहित करते हैं। उन्होंने गंगा घाट पर पहुंच कर जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ मंच से मां गंगा काे कोटि-कोटि नमन किया।
उन्होंने बताया कि महाकुंभ आयोजन के बाद उन्हें यहां दोबारा आने का अवसर प्राप्त हुआ है। कहा कि श्री जगन्नाथ का प्रसाद तब तक महाप्रसाद नहीं बनता जब तक मां विमला देवी जी को भोग नहीं लगता। इस प्रकार भगवान जगन्नाथ नारी सशक्तीकरण का संदेश देते हैं। यह एक स्थापत्य का शुभारंभ नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आत्मिक चेतना के पुनर्जागरण का महोत्सव है।
उन्होंने ओडिशा में होने वाले दिव्य व भव्य विकास कार्यों का उल्लेख करते हुये सभी को आमंत्रित किया। कहा कि प्रयागराज से ओडिशा का संबध अटूट है। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि संगम के तट से दिलों का संगम हो, दलों का संगम हो। संगम के तट से संगम का संदेश लेकर जाएं।
कार्यक्रम में ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य, उप्र के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, भारत चैतन्य युवाजन पार्टी के अध्यक्ष एवं संस्थापक रामचंद्र यादव, विनोद बागरोडिया, एपी सिंगला, वेदा स्वामी, स्वामी ईश्वरदास, स्वामी शुक्रायनाथ, दिनेश शाहरा, अरुण सारस्वत, जगदीश परमार्थी आदि मौजूद रहे।