भ्रूण हत्या में मारी गईं कन्याओं के लिए अरैल संगम पर किया गया तर्पण।
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भ्रूण हत्या में मारी गईं कन्याओं के मोक्ष के लिए अपराध बोध के साथ प्रयागराज के अरैल संगम तट पर में श्राद्ध तर्पण किया गया। अजन्मी कन्याओं का के निमित्त तर्पण करके उनकी मोक्ष की कामना की गई। समाजसेवी पतविंदर सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ संगम तट पर पहुंचकर पिंडदान कर मारी गई कन्याओं की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
सरदार पतविंदर सिंह का कहना है कि लोग अपने पितरों का पिंडदान करते हैं पर इन्हें भूल जाते हैं कि वो भी इन्ही का हिस्सा थीं, इसलिए आज उन्हें याद करते हुए हम ये पिंड दान करते हैं और इसके साथ ही घाट में उपस्थित श्रद्धालुओं को ये संकल्प भी दिलवाते है की न भ्रूण हत्या करेंगे और न करने देंगे ये महापाप है। दूसरी तरफ लोगों की ऐसी अनोखी पहल भी बेटियों को बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
दरअसल कोख में ही कन्या होने की वजह से भ्रूण हत्या करने की वजह से बच्चियों की मौत होने की खबरें मीडिया में आती रहती हैं। ऐसी अजन्मी बच्चियों के लिए श्राद्ध और तर्पण का आयोजन किया उनको भी मोक्ष देने के लिए तर्पण की परंपरा की गईl निश्चित ही नियति के विधान से बच्चियां अधिकारी थीं। इस धरा पर आने की, हंसने-खिलखिलाने की, सपने देखने व इन सपनों को घरौंदों के शक्ल में संवारने-सजाने की, लेकिन 21वीं सदी में भी रुढ़िवादियों की विकृत और निर्मम सोच के चलते ऐसा हो न सका।
सिर्फ कन्या होने के अपराध में मां की कोख में ही मार दी गईं। बच्चियों की आत्मा की शांति के लिए ही धर्म कार्य किया गया। समस्त समाजसेवी,समाज सुधारक इस कृत्य के लिए स्वयं को एक बेचैन अपराध बोध से ग्रसित पाता है। श्राद्ध तर्पण में सरदार पतविंदर सिंह,संजय श्रीवास्तव,रविंद्र सिंह राजपाल,बाबूजी यादव,चंद्रभान यादव,हरमनजी सिंह,दलजीत कौर जैसे कई स्वयंसेवक-राष्ट्रभक्त साथ रहे।