मेजा/झूंसी (इलाहाबाद)। मेजा तहसील में बिजौरा गांव के किसान शिवपूजन तिवारी ने किसान क्रेेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये एसबीआई से 52 हजार रुपये का कर्ज लिया था। उनके पास सात बीघा जमीन है। फसल तबाह हो चुकी है। बहुत दौड़भाग के बाद वह सात हजार रुपये का इंतजाम कर सके लेकिन 45 हजार रुपये का कर्ज अब भी बाकी है। शिवपूजन को कर्ज उतारने के लिए एक और कर्ज चाहिए लेकिन साहूकार इसके लिए तैयार नहीं है। शिवपूजन खेत गिरवी रखने को तैयार हैं, पर साहूकार खेत बेचने की बात कर रहा है। अगर खेत बेच दिया तो पूरी तरह से कंगाल हो जाएंगे। वैसे भी फसल बर्बाद होने के बाद परिवार के भूखे मरने की नौबत आ गई है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में रूंधी आवाज में बोले, ‘कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। चौतरफा मुसीबत ने घेर रखा है। लगता है जो और किसानों ने किया, वह मुझे भी करना होगा।’ इसी तहसील में समलीपुर गांव के किसान अनिल दुबे ने केसीसी के जरिये बैंक ऑफ बड़ौदा से दो लाख रुपये का कर्ज लिया। 50 बीघा खेत में सिर्फ इतना गेहूं पैदा हुआ, जिसे पूरा बेचने के बाद 50 हजार रुपये से अधिक नहीं मिलेंगे।
अगर सब बेच दिया तो खुद और परिवार वालों के खाने के लिए क्या बचेगा। शिवपूजन और अनुल दुबे सहित जिले के तकरीबन एक लाख किसानों की यही हालत है, जिन्होंने केसीसी के जरिये कर्ज लिया और अब उस कर्ज को उतारने के लिए साहूकारों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं।
इसी तरह बहादुरपुर विकास खंड में सहसों और हनुमानगंज के किसान अनिल सिंह, कृष्णचंद्र भारतीय, सावित्री देवी, पुत्तीलाल भारतीय, गिरिजा प्रसाद, गीता भारतीया, संजय सिंह, सतीश राय, सुरेंद्र सिंह सहित तमाम किसानों ने कर्ज लेकर खेती की। किसी ने बैंक तो किसी ने साहूकार से कर्ज लिया। इतनी भी फसल नहीं हुई कि सूद चुकाया जा सके। किसानों का कहना है ऋण माफी की बात करना भी बेमानी है।
कम से कम पिछले दस वर्षों से तो किसी तरह की ऋण माफी योजना का लाभ नहीं मिला। नेता भले ही चुनावी सभाओं में ऋण माफी की बात करें पर किसानों को कभी मालूम नहीं चलता है कि सरकार ने कब उनका ऋण माफ किया। जब सरकार अपना पैसा छोड़ने को तैयार नहीं है तो किसानों को मजबूरी में साहूकारों के पास ही जाना होगा और अपना खेत गिरवी रखना या बेचना पड़ेगा।
मंत्री-नेता अक्सर यह घोषणा करते सुने जाते हैं कि सरकार ने किसानों के ऋण माफ कर दिए हैं लेकिन किसानों को इसका कोई फायदा नहीं मिल पाता है। यूपी सरकार ने घोषणा की थी कि किसानों को 50 हजार रुपये तक के ऋण माफ किए जाएंगे लेकिन ज्यादातर किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिला, क्योंकि इस योजना में राष्ट्रीयकृत बैंकों को शामिल नहीं किया गया और 90 फीसदी से अधिक किसान केसीसी के जरिये राष्ट्रीयकृत बैंकों से ही कर्ज लेते हैं। अग्रणी बैंक जिला प्रबंधक अतीश मिश्र का कहना है कि पिछले 12 वर्षों के दौरान राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए ऋण माफी की फिलहाल कोई योजना नहीं आई है। इससे इतर संस्थाओं से कर्ज लेकर खेती करने पर 50 हजार रुपये तक की ऋण माफी का प्रावधान है। मसलन, भूमि विकास बैंक में जमीन बंधक रखते हुए कर्ज लेना आदि।