इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के राजातालाब थाने में आपराधिक मामले की विवेचना में पुलिस की लापरवाही को गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारी के स्थानांतरण के बाद लंबे समय तक विवेचना किसी और को नहीं सौंपने पर एसएचओ से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के राजातालाब थाने में आपराधिक मामले की विवेचना में पुलिस की लापरवाही को गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारी के स्थानांतरण के बाद लंबे समय तक विवेचना किसी और को नहीं सौंपने पर एसएचओ से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने राहुल सिंह उर्फ विशाल सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर दिया। मामले में 13 अगस्त 2026 को सुनवाई पर कोर्ट को बताया गया था कि पीड़ित के शरीर पर कई फ्रैक्चर हैं। इसके बावजूद पुलिस ने गंभीर चोटों के अनुरूप धाराएं नहीं लगाईं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए थे। इस पर कोर्ट ने तत्कालीन विवेचना अधिकारी को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा था।
कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बुधवार को पूर्व विवेचना अधिकारी सब-इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार पांडेय अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि मई 2025 में उन्हें मामले की विवेचना सौंपी गई थी पर जून में उनका स्थानांतरण हो गया। तबादले के बाद उन्हें मामले की विवेचना की वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं है।
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अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि विवेचना अधिकारी के तबादले के बाद नियमानुसार एसएचओ को किसी अन्य पुलिस अधिकारी को जांच सौंपनी चाहिए थी। जून के बाद से विवेचना किसी और अधिकारी को नहीं सौंपी गई। इससे जांच आगे नहीं बढ़ सकी। 16 सितंबर को सुनवाई होगी।