सार
सोमवार को हुई सुनवाई में मंदिर पक्ष की पैरवी में तर्क दिया गया कि काशी में शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने ही की थी, इसीलिए वह स्वयंभू कहलाते हैं। काशी खंड में भी इसका वर्णन किया गया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकलपीठ कर रही है।
श्रृंगार गौरी पूजा की अनुमति पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त करने के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई मंगलवार, छह दिसंबर को भी होगी। सोमवार को हुई सुनवाई में मंदिर पक्ष की पैरवी में तर्क दिया गया कि काशी में शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने ही की थी, इसीलिए वह स्वयंभू कहलाते हैं। काशी खंड में भी इसका वर्णन किया गया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकलपीठ कर रही है। याचिका पर मंदिर पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने ऑन लाइन बहस की। कहा, संपत्ति स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर की मूर्ति में निहित है। विपक्षीगण 1947 के पहले से श्रृंगार गौरी की पूजा करते आ रहे हैं। उन्होंने केवल पूजा के अधिकार की मांग की है, जिससे याची के किसी विधिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। इस्लामिक कानून में दूसरे की संपत्ति पर इबादत कुबूल नहीं होती।