आज सुबह नौ बजे की बैठक में होगा फैसला
प्रयागराज। शिक्षा सेवा अधिकरण प्रयागराज में स्थापित करने की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से लगातार न्यायिक कार्य से विरत चल रहे अधिवक्ताओं की बैठक मंगलवार को बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई। तय किया गया कि बुधवार सुबह नौ बजे फिर से आम सभा होगी, जिसमें न्यायिक कार्य शुरू करने या नहीं करने पर निर्णय लिया जाएगा।
मंगलवार को आम सभा की बैठक दिन में एक बजे प्रस्तावित थी। इसी बीच मुख्य न्यायाधीश का बुलावा आ गया। उन्होंने बार के सभी पूर्व व वर्तमान पदाधिकारियों तथा वरिष्ठ अधिवक्ताओं को दिन में 2 बजे वार्ता के लिए बुलवाया। इसके मद्देनजर आम सभा की बैठक में दिन में तीन बजे तक के लिए टाल दी गई। तीन बजे आम सभा शुरू हुई तो अध्यक्ष राकेश पांडेय, पूर्व अध्यक्ष आरके ओझा, अमरेंद्र नाथ सिंह आदि ने सदस्यों को मुख्य न्यायाधीश से हुई वार्ता की जानकारी दी। मुख्य न्यायाधीश ने वादकारियों और न्यायपालिका के हित में काम शुरू करने की अपील की है। इस पर आम सभा को निर्णय लेना था मगर शाम साढ़े चार बजे तक वार्ता के बावजूद को इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका।
बार के तमाम सदस्य बिना किसी सफलता या ठोस आश्वासन के न्यायिक कार्य शुरू करने के पक्ष में नहीं थे। इसे लेकर बीच बीच में हंगामा भी होता रहा। अंत में बैठक अगले दिन सुबह नौ बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। बुधवार सुबह नौ बजे फिर से इस विचार होगा। बैठक में पूर्व अध्यक्ष वीपी श्रीवास्तव, सीएल पांडेय, ओपी सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश सहाय, दया शंकर मिश्र, सीपी पांडेय, एसी तिवारी, प्रभाशंकर मिश्र, उदयशंकर तिवारी, विष्णु पांडेय, अनुराधा सुंदरम्, शशिप्रकाश सिंह, प्रशांत सिंह रिंकू के अलावा संयुक्त सचिव प्रेस सर्वेश कुमार दुबे तथा बार के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। सभा का संचालन महासचिव जेबी सिंह ने किया।
हाईकोर्ट प्रशासन ने की काम पर लौटने की अपील
वहीं, हाईकोर्ट के प्रोटोकॉल विभाग की ओर से जारी विज्ञाप्ति में कहा गया है कि अधिवक्ताओं ने 29 जुलाई को न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव 26 जुलाई को प्रेषित किया था। इसके बाद से समय समय पर कई बार न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव दिया गया। 27 अगस्त से अधिवक्ता लगातार न्यायिक कार्य से विरत हैं। मुख्य न्यायाधीश ने समय समय पर अधिवक्ताओं के साथ बैठकों और पत्रों के माध्यम से उनसे न्यायिक कार्य शुरू करने की अपील की है। महानिबंधक ने भी इसी आशय का पत्र जारी कर अपील की है। अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण न्यायिक प्रक्रिया की क्षति हो रही है। मंगलवार तीन सितंबर को भी मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं के साथ बैठक में अपनी शिकायतों के लिए संवैधानिक रास्ता तलाशने की सलाह देते हुए काम पर लौटने की अपील की है।
वीसी मिश्र ने दिया एक्शन कमेटी से इस्तीफा
प्रयागराज। शिक्षा सेवा अधिकरण को लेकर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में उस समय मनमुटाव की स्थिति आ गई जब आंदोलन के लिए बनी एक्शन कमेटी से वरिष्ठ अधिवक्ता और वकीलों के बीच भीष्म पितामह कहे जाने वाले वीसी मिश्र ने इस्तीफा दे दिया। वीसी ने अपने त्यागपत्र में अध्यक्ष राकेश पांडेय पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। इससे क्षुब्ध होकर उन्होंने त्यागपत्र देने का निर्णय लिया। हालांकि उनके त्यागपत्र की जानकारी होने पर अध्यक्ष राकेश पांडेय ने बिना शर्त माफी मांगते हुए उनसे इस्तीफा वापस लेने की अपील की है। अध्यक्ष का कहना है कि किसी बात से असहमति को दुर्व्यवहार नहीं समझा जाना चाहिए। बार एसोसिएशन इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है इसलिए वीसी मिश्र जैसे अनुभवी व्यक्ति के मार्गदर्शन की हम लोगों को आवश्यकता है। उन्होंने पूरे मामले पर फिर से विचार कर निर्णय लेने का अनुरोध किया है।