इलाहाबाद(ब्यूरो)। शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किए जाने की नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सभी पक्षों की बहस शुक्रवार को पूरी हो गई। अदालत अब इस मामले में शनिवार को निर्णय सुना सकती है। महत्वपूर्ण यह है कि शनिवार को अवकाश के बावजूद अदालत फैसला लिखाएगी। शिवम् राजन सहित दर्जनों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है।
याचीगण के वकीलों की दलील थी कि शिक्षा मित्रों की नियुक्ति अवैध है। प्रदेश सरकार ने योग्यता का मानक पूरा किए बिना ही उनको सहायक अध्यापक बना दिया जबकि एनसीटीई की गाइड लाइन में दी गई अर्हता को वह पूरा नहीं करते हैं। शिक्षा मित्रों को संविदा पर 11 माह के रखा गया था उनकी नियुक्ति के लिए न तो विज्ञापन जारी हुआ और न ही आरक्षण नियमों का पालन किया गया। इस स्थिति में नियमितीकरण करने की बात अनुचित है।
प्रदेश सरकार का कहना था कि शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में खाली हैं इनको भरने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या में बीटीसी प्रशिक्षित अभ्यर्थी नहीं है इसलिए शिक्षा मित्रों को विशेष प्रशिक्षण देकर नियुक्ति दी गई है। अदालत इस मामले में शनिवार को अपना निर्णय सुना सकती है।