शीला दीक्षित की अस्थियां संगम में विसर्जित
0 परिजनों संग अस्थि कलश लेकर आए बेटे संदीप दीक्षित
0 जनता के दर्शनार्थ सर्किट हाउस में रखा गया अस्थि कलश
प्रयागराज। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अस्थियां बुधवार को संगम में विसर्जित की गईं। इससे पहले तीर्थपुरोहित ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अस्थि कलश का पूजन कराया। बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित नई दिल्ली से प्रयागराज एक्सप्रेस से उनका अस्थि कलश लेकर बुधवार की सुबह प्रयागराज आए थे। अस्थि कलश को जंक्शन से सीधे सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां कुछ देर के लिए उसे जनता के दर्शनार्थ रखा गया। इसके बाद विसर्जन के लिए अस्थिकलश को गाड़ियों के काफिले के साथ संगम ले जाया गया।
विसर्जन के समय बेटे संदीप दीक्षित के साथ उनकी पत्नी और बेटियां भी मौजूद थीं। शीला दीक्षित को अंतिम प्रणाम कहने और उनके अस्थि कलश पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि देने के लिए सर्किट हाउस और घाट पर कांग्रेसी जुटे। इनमें जिलाध्यक्ष अनिल द्विवेदी, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय, पूर्व महापौर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह, परवेज अंसारी संजय तिवारी, रमेश पांडेय, हरिकेश त्रिपाठी, फुजैल हाशमी, मुकुंद तिवारी, अजय श्रीवास्तव, अनिल पांडेय, आलोक पांडेय सहित अनेक कांग्रेसी शामिल थे।
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मां की इच्छा थी, संगम में ही विसर्जित हों अस्थियां
‘मेरी इच्छा है कि मेरे निधन के बाद मेरी अस्थियों को संगम में विसर्जित किया जाए’ यह कहना था दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का, जिनकी अस्थियां बुधवार को संगम में विसर्जित की गईं। संगम में मां की अस्थियां विसर्जित करने के बाद बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा, संगमनगरी और संगम से मेरे परिवार का पुराना नाता रहा है। पिताजी और दादाजी की अस्थियां भी संगम में ही विसर्जित की गईं थीं।
बकौल संदीप दीक्षित, शीलाजी केअस्थि कलश को विसर्जित करने के लिए दो जगहों पर ले जाया जाना था, पहला गंगोत्री और दूसरा प्रयागराज। आज उन्हें हमसे विदा हुए तकरीबन एक माह पूरा होने को है। इस बीच कई बार यहां आने का कार्यक्रम बना लेकिन उन्हें श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए दिल्ली में लोगों के आने-जाने का सिलसिला ऐसा बना रहा कि यह कार्यक्रम स्थगित होता रहा। पूरे परिवार के साथ आज हम अस्थिविसर्जन और संगम दर्शन के लिए यहां आ सके।