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संगम पर प्रदूषित गंगा-यमुना की धारा प्रदूषित

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प्रयागराज। कानपुर में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया। साथ ही उन शहरों के लिए इसे जरूरी बताया, जो कि गंगा के किनारे स्थित हैं। गंगा के महत्वपूर्ण पड़ावों में प्रयागराज का खास स्थान है और यहां इस पावन नदी की जो स्थिति है, वह वह बेहद चिंताजनक है। शहर के 40 नालों का पानी सीधे गंगा में गिरता है। बाकी बचे 20 नाले हर साल माघ मेला करीब आते ही बंद कर दिए जाते हैं। आगे भी यह बंद रहेंगे, इसमें संशय है। यही कारण है कि संगमनगरी में करीब 2500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च के बाद भी गंगा निर्मल नहीं हो सकी है।
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दरअसल, निर्मलीकरण योजनाओं के अमल पर दावे और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। संगम तट पर भी श्रद्धालुओं को डुबकी लगाने के लिए शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में संगम पर भी डिजाल्ब आक्सीजन (डीओ) और बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड( बीओडी) की मात्रा सामान्य से ज्यादा पाई गई है। गंगा निर्मलीकरण के लिए प्रयागराज में नालों को बंद करने के साथ ही गंदे पानी के शोधन के लिए आठ जगहों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं। इन आठ एसटीपी में तीन ऐसे हैं, जो पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। गंगा निर्मलीकरण के लिए पिछले एक दशक में एसटीपी व सीवरेज सिस्टम पर कुल 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं लेकिन, नाले पूरी तरह बंद नहीं हो सके हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से 10 नालों पर फिल्टर लगाया गया है। छह नालों पर इन सी-2 सिस्टम के तहत नालों के गंदे पानी का शोधन करने की व्यवस्था की गई है। लेकिन, 40 नाले गंगा में बह रहे हैं। दूसरी ओर गंगा में बेली कछार, तेलियरगंज, गोविंदपुरा, शिवकुटी, सलोरी, बाघाड़ा, दारागंज, अल्लापुर, मुट्ठीगंज, बलुआ घाट से बिना रिकार्ड के भी बहाए जा रहे हैं नाले।
इकाई के महाप्रबंधक पीके अग्रवाल बताते हैं कि माघ मेले के तहत 35 नालों को बायोरेमिडिएशन के तहत 25 दिसंबर से शोधित करने का काम शुरू करा दिया जाएगा। इन नालों को हमेशा के लिए बंद करने के लिए भी योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए नैनी, झूंसी व फाफामऊ में नए एसटीपी लगाने के साथ ही सीवरेज सिस्टम की क्षमता वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि गंगा में नालों के गंदे पानी का जीरो डिस्चार्ज किया जा सके।
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प्वाइंटर:
- 56 सूचीबद्ध नालों से शहर का गंदा पानी- कचरा बहाया जा रहा है।
- 10 नालों पर फिल्टर लगाकर किया जा रहा है
- 06 नालों पर एन सी -2 सिस्टम लगाया गया है
- 35 नालों की बायोरेमिडिएशन तकनीक से माघ मेले के दौरान सफाई कराने की योजना
नैनी, झूंसी, फाफामऊ में एसटीपी स्वीकृत, 767.60 करोड़ रुपये होंगे खर्च
प्रयागराज। गंगा में गिरने वाले नालों को पूर्ण रूप से बंद करने केलिए नए इलाकों में नमामि गंगे परियोजना के तहत तीन जगहों पर एसटीपी निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत 767.60 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिली है। महाप्रबंधक पीके अग्रवाल के मुताबिक इसके तहत फाफामऊ, नैनी और झूंसी में एसटीपी निर्माण कराए जाएंगे।
सीवरेज सिस्टम के क्षमता वृद्धि का शासन को भजेंगे प्रस्ताव
प्रयागराज। सीवरेज सिस्टम को सुधारने और अपग्रेड करने के लिए 321.19 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इसे भी जल्द ही मंजूरी मिलने के संकेत मिले हैं। इसके तहत क्षमता वृद्धि की जाएगी और नई लाइनों को बिछाया जाएगा।
संगम पर जल प्रदूषण का हाल
3 दिसंबर मात्रा सामान्य स्थिति
प्रजेंटेशन ऑफ हाइड्रोजन(पीएच) 7.81 6.05
डिजाल्ब आक्सीजन (डीओ) 8.01 8.05
बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) 3.4 3 मिलीग्राम प्रति ली से कम
10 दिसंबर मात्रा सामान्य स्थिति
प्रजेंटेशन ऑफ हाइड्रोजन(पीएच) 8.01 6.05
डिजाल्ब आक्सीजन (डीओ) 10.07 8.05
बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) 3.2 3 मिली ग्राम प्रतिली से कम
प्रतिदिन गंगा जल की संगम समेत पांच स्थानों पर जांच कराई जा रही है। इसमें संगम के अलाला शास्त्री ब्रिज, छतनाग, पूरामुफ्ती व सरस्वती घाट पर बीओडी लोड की मात्रा सामान्य से कुछ अधिक पाई गई है। गंगा प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। गंगा में बहने वाले नालों को बंद कराने के लिए पत्र लिखा गया है। - जेबी सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड।
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