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साझा की खुशियां, संग महकी गोश्त, सेवइयों की खुशबू

Sat, 26 Sep 2015 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। खुदा की राह में कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अजहा शुक्रवार को अकीदत और पूरी संजीदगी से मनाया गया। सभी रास्ते इबादतगाहों की ओर मुड़े। ईदगाह, जामा मस्जिदों सहित शहर की तमाम मस्जिदों में खुदा की बारगाह में सजदा के लिए नमाजी जुटे। बीते तकरीबन एक दशक के दौरान यह पहला मौका था जब जुमे को ही बकरीद भी रही लिहाजा सुबह बकरीद की खास नमाज के बाद जुमे की नमाज के लिए भी दोबारा बड़ी जमात जुटी। नमाज के दौरान कुर्बानी के फजायल और एहकाम बताए गए।
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सभी जगहों पर मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली, आपसी भाईचारे और सलामती के लिए दुआएं मांगी गईं तो कई जगहों पर मक्का के मिना हादसे में मारे गए लोगों की मगफिरत और बाकी सभी की सलामती के लिए दुआएं की गईं। इबादतगाहों से बाहर निकलकर लोगों ने एक दूसरे को ईदुल अजहा की मुबारकबाद दी और यह सिलसिला देर रात तक जारी भी रहा।

वापसी में हजरत इब्राहिम की ओर से पेश की गई कुर्बानी की याद में खुदा के हुक्म की तामील की गई। कुर्बानी कराने के लिए सभी में बेताबी दिखी, ऐसे में चिकवों की ज्यादा मांग की वजह से उनकी चांदी भी रही। इसी तरह कुर्बानी से पहले दुआ के लिए मौलवियों की भी मांग रही। मुबारकबाद देने के लिए लोगों का एक दूसरे के घर आने-जाने का सिलसिला देर रात तक जारी रही। इस आवाजाही से तमाम मुस्लिम इलाकों में चहल पहल बनी रही। सोशल साइट्स पर भी लोगों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी।
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खुशनुमा माहौल के बीच घरों में गोश्त और सेवइयां की खुशबू संग महकी। ईदुल अजहा पर लोगों को अपने गैर मुस्लिम दोस्तों का सबसे ज्यादा इंतजार रहा। बकरीद और जुमे की नमाज के कारण लोगों को दिन में थोड़ी व्यस्तता जरूरी रही लेकिन जुमे की नमाज के बाद खाने-खिलाने का सिलसिला शुरू हुआ तो देर रात तक जारी रहा। सबसे ज्यादा खुश बच्चे नजर आए, वहीं महिलाएं मेहमानों के स्वागत में तरह-तरह की खाने-पीने की चीजें बनाने में जुटी रहीं।

ईदुल अजहा पर कुर्बानी कराने के लिए सभी की बेताबी के कारण चिकवों की मांग बहुत ज्यादा रही। हालांकि कई दिनों पहले ही उनकी बुकिंग कराई गई थी, फिर भी कई जगहों पर चिकवे नहीं पहुंचे तो दूसरे से खुशामद करनी पड़ी। आपाधापी में चिकवे एक जगह जबीहा केबाद, कुर्बानी कराने के लिए दूसरी जगह पहुंचे। इतना ही नहीं कई जगहों पर तो सिर्फ जबीहा करके चले गए। गोश्त को टुकड़ों में करने के लिए दोपहर बाद आए।
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