प्रयागराज। वेदियों पर स्वास्तिक की अल्पनाएं उकेर कर कलश स्थापन, मंगला चरण और वेद की ऋचाओं के गान के साथ आदि शक्ति स्वरूपा की नौ दिवसीय आराधना का शारदीय नवरात्र शनिवार को आरंभ हो गया। सर्व मंगलमयी सर्वार्थ सिद्धि योग में मां का सविधि आह्वान किया गया। कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार दूरी बनाकर वेदियों पर सुख-समृद्धि के प्रतीक जौ के बीज बोए गए। इसी के साथ रक्तबीज दानव रूपी कोरोना महामारी से मुक्ति, विश्व में शांति और सबके कल्याण की कामना से अखंड दीप जलाकर अब नौ दिन तक मां दुर्गा की उपासना होगी।
अरसा बाद शनिवार को प्रतिपदा तिथि की शुरुआत चित्रा नक्षत्र में होने की वजह से ब्रह्म मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं हो सकी। व्रतियों को मां के आह्वान के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। दिन के11:52 बजे स्वाति नक्षत्र से युक्त अभिजीत मुहूर्त में मां दुर्गा का आह्वान कर कलश स्थापना की गई।
इस दौरान चौकियों पर वेदियां बनाकर चंदन, हल्दी और रोली से स्वास्तिक व शुभ लाभ की अल्पनाएं उकेरी गईं। फिर, गंगा जल से कलश को भरकर गौरी -गणेश पूजन कर मां भगवती का आह्वान किया गया। वेदियों पर जौ उगाए गए। मान्यता है कि नौ दिन की आराधना के दौरान जौ के पौधे की जितनी वृद्धि होती है, उसी तुलना में भक्तों पर मां की कृपा का अंदाजा लगाया जाता है।
फिलहाल पुरोहितों की मौजूदगी में घरों में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए कलश स्थापना की गई। अशोकनगर की अर्पणा सिन्हा ने बताया कि उन्होंने इस नवरात्र में कोरोना माहामारी रूपी दानव के वध के लिए मां से गुहार लगाई है और संकल्प किया है। इसी तरह टैगोर टाउन की प्रियंवदा ने भी कलश स्थापना कोरोना से मुक्ति के साथ ही सर्व मंगल और विश्व कल्याण के लिए किया। इसी तरह अखंड दीप जलाकर घरों से लेकर मंदिरों तक भक्त मां की उपासना में लीन हो गए हैं। अब विश्व मंगल की कामना से नौ दिन तक दुर्गा स्तोत्र और शतचंडी, दुर्गा सप्तशती के पाठ भी होंगे।