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जयशंकर प्रसाद की रचनाएं अब भी प्रासंगिक

Sun, 18 Jun 2017 04:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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प्रकाशचंद्र जुगमन्दरदास अग्रवाल लोकहित ट्रस्ट की ओर से आर्य कन्या डिग्री कालेज में ‘प्रसाद साहित्य : नवजागरण का उद्घोष’ विषय पर दो दिवसीय गोष्ठी मंगलवार को शुरू हुई। मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुमुद शर्मा ने भूमंडलीकरण के दुश्चक्र से साहित्य को बचाने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की आकांक्षा और संघर्ष, अतीत एवं इतिहास प्रसाद के काव्य में गौरव बनकर आते हैं।
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  प्रसाद वेदना से करुणा और करुणा से आनंद तक पहुंचाकर समरसता का संदेश देते हैं। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर भरत सिंह ने कहा कि स्त्री, दलित, आदिवासी आदि विमर्शों के बीच प्रसाद आज भी प्रासंगिक हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय केप्रोफेसर रामकिशोर शर्मा ने कहा कि प्रसाद की रचनाआें ने पूरे विश्व और समाज के हर वर्ग के लोगों को राह दिखाई। लखनऊ विश्वविद्यालय के कृष्णजी श्रीवास्तव ने कहा कि जयशंकर प्रसाद का साहित्य आज भी प्रासंगिक है। प्राचार्य डॉ.रीता पुरवार ने कहा कि प्रसाद की रचना कामायनी मानवीय संवेदनाओं की उत्कृष्ट कृति है। अलग-अलग तकनीकी सत्रों को डॉ.दीनानाथ, सुरेश चंद्र वर्मा आदि ने संबोधित किया। कालेज की छात्राओं ने प्रसाद की रचनाओं की संगीतमय प्रस्तुति की।
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