देवशयनी एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे। इसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। इस दाैरान झूंसी के विभिन्न आश्रमों में साधु और संत चातुर्मास करने आएंगे। चार महीने तक साधु-संत अभिषेक, पूजन, अनुष्ठान के साथ जप-तप करेंगे। इस बार शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद पुरी में रहकर चातुर्मास करेंगे। गृहस्थ चातुर्मास भर मांगलिक कार्य से परहेज करते हुए देवों का पूजन-अर्चन करेंगे। चातुर्मास में साधु-संत भी अपना भ्रमण बंद कर देते हैं, जो जिस मठ या आश्रम में रहते हैं वहीं पर चातुर्मास की करते हैं। झूंसी के मठों, आश्रमों में साधु-संत और संन्यासी चातुर्मास करेंगे। इस दौरान भागवत, मानस, शिव महापुराण एवं विष्णु पुराण की कथा की जाती है। चातुर्मास शुरू होने के साथ ही विवाह, गृहप्रवेश, उपनयन समेत सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इस दौरान तुलसी पूजा अत्यंत फलदायी माना जाता है। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के बाद 21 नवंबर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी।