सभी धर्मों के पूर्वज हिंदू और आर्य
सत्ता लोलुपता और अदूरदर्शिता के कारण इस प्रकार की समस्याएं पैदा हो रही हैं। शंकराचार्य ने कहा कि अगर मुस्लिम तंत्र में दमखम था तो चीन के विरुद्ध आवाज लगाते। चीन की बात तो छोड़ दीजिए, पूरे विश्व में चीन के विरुद्ध मुस्लिम तंत्र ने आवाज नहीं उठाई। जबकि, उनकी मस्जिदें तोड़ दी गईं। उन्हें वहां से खदेड़ दिया गया। पहले मुस्लिम तंत्र चीन के विरोध में अपने स्वर को बुलंद करके दिखाए कि उनमें दम है। पुरी शंकराचार्य ने कहा कि मोहम्मद साहब और ईसा मसीह के साथ ही सबके पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिंदू ही हैं। कहा कि विश्व के जिन देशों में हिंदू कम हैं या है ही नहीं, वहां ईसाई और मुसलमान आपस में लड़ रहे हैं। इनको अपने स्वभाव में परिवर्तन करना चाहिए।
गुरु गोविंद सिंह की भावना पर किया जा रहा आघात
अपना जीवन सबके लिए कल्याण के लिए प्रयुक्त होना चाहिए। सनातन बोर्ड के गठन के सवाल पर कहा कि इस संबंध में अभी तक मुझसे नहीं पूछा गया है। कहा कि यह प्रक्रिया लड़ने-भिड़ने की है। महाराष्ट्र और यूपी के उप चुनाव को लेकर बटेंगे तो कटेंगे के नारे के सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि राजनेताओं और समाज का अपना स्तर है। यह सार्वभौम सिद्धांत हैं। इसका लाभ तो दूसरे लोग ज्यादा उठाएंगे।
खालिस्तान को लेकर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अटल विहारी वाजपेयी को पत्र लिखकर कहा था कि संभलकर शासन कीजिए। खालिस्तान, मुगलिस्तान, दलितस्तान, ईसाईस्तान और द्रविड़स्तान भारत के पांच विभाग अंदर-अंदर हो चुके हैं। जब जिसकी दाल गल जाएगी, वो भारत को विखंडित किए बिना नहीं रहेंगे। गुरु गोविंद सिंह ने कहा था खालसा पंथ और हिंदू धर्म है।
अब अपने पूर्वज और विशेषकर गुरु गोविंद सिंह की भावना और मान्यता पर ही आघात किया जा रहा है। यह उचित नहीं है। भारत से जो देश टूटकर बने आज कोई खुश नहीं है। कहा कि संविधान की धारा -25 के तहत जैन, बौद्ध और सिख हिंदू परिभाषित किए गए हैं। आरक्षण के मोह में फंसकर जैन, बौद्ध और सिखों ने अपने को अल्पसंख्यक घोषित किया। अगर यह धारा- 25 को मानते तो जनसंख्या की दृष्टि से हम विश्व में दूसरे स्थान पर होते। पहले स्थान पर पहुंचने का मार्ग भी प्रशस्त हो जाता।