shankaracharya nishchalanand saraswati
- फोटो : प्रयागराज
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने बृहस्पतिवार को नकली बाबाओं और फर्जी शंकराचार्यों से लोगों को सावधान किया। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दलों के अपने संत हैं। फर्जी शंकराचार्य भी खूब बनाए गए हैं। भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा के मंचों पर बैठने के लिए झंडों और विचारों के स्तर पर राजनीतिक रूप से बंटे संतों की ओर भी उन्होंने इशारा किया। साथ ही इस तरह के षड्यंत्र से धर्म-संस्कृति को बचाने पर जोर दिया।
त्रिवेणी मार्ग स्थित माघ मेला के गोवर्धनपुरी मठ शिविर में बृहस्पतिवार की दोपहर शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से उनका कोई संबंध नहीं है। वर्षों पहले कुछ लोगों ने कूटनीतिक चाल के तहत अखाड़ा परिषद से मान्यता लेने के लिए उनको सलाह दी थी। तब उनको यह भी पता नहीं था कि शंकराचार्य को अखाड़ा परिषद से मान्यता लेने की की बात कितनी हास्यास्पद है। उन्होंने बताया कि अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने वर्षों पहले उनके निर्देशन में काम करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाद में वह कहीं और जुड़ गए।
फर्जी शंकराचार्यों को मान्यता दिलाने के सवाल पर उनका कहना था कि देश में शंकराचार्य की सिर्फ चार ही पीठें हैं, लेकिन एक राजनीतिक दल से जुड़े बड़े नेता ने 50 से अधिक शंकराचार्य खड़े दिए। ऐेसे फर्जी शंकराचार्यों को मान्यता भी दिलाई गई। एक राजपरिवार से जुड़े शूटेड-बूटेड व्यक्ति को भी 1975 के आसपास शंकराचार्य बना दिया गया था। स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि एक चुनाव में साक्षी महाराज को भी टिकट देकर शंकराचार्य के तौर पर पेश किया गया था। इस तरह के दुष्प्रचारों से शंकराचार्य की परंपरा को चौपट करने का षड्यंत्र किया जा चुका है। इससे सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लार्ड मैकाले ने इसी तरह शिक्षा और संस्कृति को नष्ट करने का षड्यंत्र रचा था और वह सफल भी रहा। शंकराचार्य ने कहा कि अब तो भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा के मंचों पर बैठने वाले संत भी अलग-अलग तैयार किए गए हैं।
गणित पर किताब लिख रहे हैं शंकराचार्य
प्रयागराज। पुरी के शंकराचार्य ने कहा कि अभी उनका पूरा ध्यान अखंड भारत के निर्माण के लिए वातावरण बनाने पर है। इसके लिए वह विश्व स्तर पर मनन-चिंतन कर रहे हैं। उन्होंने गणित पर एक किताब लिखने की भी जानकारी दी। बताया कि गणित पर आने वाली उनकी पुस्तक 1300 पृष्ठों की होगी।