कलक्ट्रेट और तहसील परिसर में दूसरे दिन गुरुवार को महापौर पद के लिए निर्दल प्रत्याशी के रूप में मनीष जायसवाल ने पर्चा दाखिल किया। जबकि पार्षद पद के लिए सात प्रत्याशियों ने नामांकन किया। इस तरह दूसरे दिन नामांकन का खाता खुल गया। दूसरी ओर नामांकन पत्र खरीदने वालों की लंबी लाइन लगी रही। महापौर पद के लिए दो दिनों में 14 लोगों ने 27 और पार्षद के लिए 751 लोगों ने 810 नामांकन पत्र खरीदे। कलक्ट्रेट और तहसील परिसर में भीड़ होने की वजह से पुलिस बढ़ा दी गई थी। परिसर के अंदर आधार कार्ड और वोटर आईडी देखकर ही लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई। कई संभावित प्रत्याशियों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं दिखे तो वह तहसील और नगर निगम कार्यालय में भागदौड़ करते रहे।
जिलाधिकारी न्यायालय कक्ष में महापौर के लिए ऊषा जोशी, अरविंद कुमार जायसवाल, अजय कुमार शुक्ला, फूलचंद्र दुबे, संजय तिवारी, बृजेश केशरवानी, नरेश श्रीवास्तव, नरेंद्र नाथ केशरवानी, राज कुमार, अनिल कुमार श्रीवास्तव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव तथा उमेश गुप्ता ने नामांकन पत्र खरीदे। पंच स्थानिक निर्वाचन कार्यालय में मतदाता की प्रमाणित प्रति लेने के लिए सुबह से देर शाम तक संभावित प्रत्याशियों की भीड़ लगी रही। आयोग के निर्देश हैं कि दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने वाले पार्षद पद के प्रत्याशी को प्रमाणित प्रति नामांकन पत्र के साथ जमा करनी होगी। सहायक निर्वाचन अधिकारी डीके तिवारी ने बताया कि अपने ही वार्ड से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को प्रमाणित प्रति लेने की आवश्यकता नहीं है।
नगर निगम में नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेने वालों की नगर निगम में भीड़ लगी हुई है। सर्टिफिकेट देने में हो रहे खेल की शिकायतें डीएम और नगर आयुक्त से की गईं है। आरोप है कि नो ड्यूज देने के नाम पर सुविधा शुल्क लिया जा रहा है। वोट बढ़ाने के नाम पर तहसील में कानूनगो पर गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं। संभावित प्रत्याशियों का कहना है कि उनके नाम कट गए। नाम जोड़ने के नाम पर 500 से एक हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। जिसकी शिकायत डीएम और एडीएम प्रशासन से की गई।