औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था।
- फोटो : Demo Pic
पुलिस सिपाही ने अपने उच्च अधिकारियों द्वारा दाढ़ी रखने की इजाजत नहीं देने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने अल्पसंख्यक सिपाही को नियमानुसार दाढ़ी रखने की अनुमति देने पर बिजनौर के एसपी को निर्देश दिया है। सिपाही का कहना था कि उसे अपने मजहब के अनुसार दाढ़ी रखने का अधिकार है, मगर उच्च अधिकारी इसकी अनुमति नहीं दे रहे हैं। कोर्ट ने कहा है कि एसपी दो माह में इस मामले में निर्णय लें। बिजनौर पुलिस लाइन में तैनात सिपाही नईम अहमद की याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने सुनवाई की।
याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता कैलाश प्रकाश पांडेय का कहना था कि याची मुस्लिम समुदाय का है। उसके मजहब में दाढ़ी रखने का नियम है। संविधान नागरिकों को अपना धर्म मानने की इजाजत देता है। याची ने एसपी बिजनौर को पत्र लिखकर दाढ़ी रखने की अनुमति मांगी थी, मगर वह अनुमति नहीं दे रहे हैं। इससे याची को अपनी धार्मिक रिवायतों के पालन करने में दिक्कत आ रही है। मांग की गई कि याची को दाढ़ी रखने की अनुमति देने का आदेश पारित किया जाए।
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर आईजी ने 10 अक्तूबर 1985 को एक सर्कुलर जारी किया था कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग यदि धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप दाढ़ी रखना चाहते हैं तो वह अपने नियुक्ति प्राधिकारी की अनुमति लेकर रख सकते हैं। इस आदेश के तहत याची ने अपने नियुक्ति प्राधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि 10 अक्तूबर 1985 के सर्कुलर से स्पष्ट है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अपने नियुक्ति प्राधिकारी की अनुमति से दाढ़ी रख सकते हैं, इसलिए एसपी बिजनौर याची के प्रत्यावेदन पर दो माह के भीतर निर्णय लें।