इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के नए कुलपति की चयन प्रक्रिया पर पेच फंस सकता है। कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी के दो सदस्यों की चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नया विवाद उत्पन्न हो गया है। ऑटा अध्यक्ष यूजीसी रेगुलेशन का हवाला देकर सर्च कमेटी में प्रो. सीएल खेत्रपाल को बतौर सदस्य चयनित किए जाने पर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं इविवि के पूर्व शिक्षकों एवं छात्र नेताओं के मुताबिक संसद से पारित अधिनियम के अनुसार प्रो. खेत्रपाल की नियुक्ति नियमों के तहत की गई है।
कार्य परिषद की बैठक के दौरान सर्च कमेटी के सदस्य के रूप में जब प्रो. गौतम सेन का नाम रखा गया तो सभी उस पर राजी हो गए लेकिन, प्रो. खेत्रपाल का नाम सामने आने के बाद विवाद हुआ और वोटिंग कराई गई। हालांकि बहुमत प्रो. खेत्रपाल के पक्ष में ही रहा। ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे का कहना है कि यूजी रेगुलेशन-2018 के तहत जो किसी भी प्रकार से इविवि से जुड़ा रहा, वह सर्च कमेटी का सदस्य नहीं हो सकता। जबकि प्रो. खेत्रपाल इविवि के वीसी और कार्य परिषद के सदस्य रह चुके हैं। ऑटा अध्यक्ष ने इसके खिलाफ यूजीसी, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखा है। साथ ही कहा है कि अगर मंत्रालय ने इस मामले का संज्ञान नहीं लिया तो वह न्यायालय की शरण में जाएंगे।
उधर, पूर्व शिक्षकों एवं छात्र नेताओं का कहना है कि संसद से पारित अधिनियम के अनुसार विश्वविद्यालय का कोई कर्मचारी सर्च कमेटी का सदस्य नहीं बन सकता है और प्रो. खेत्रपाल वर्तमान में कर्मचारी नहीं हैं। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने सर्च कमेटी के सदस्य के तौर पर प्रो. सेन और प्रो. खेत्रपाल को सदस्य चुने जाने पर कार्य परिषद को बधाई दी है। रोहित का आरोप है कि विरोध करने वाले ऑटा अध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे पूर्व कुलपति प्रो. हांगलू के काफी करीबी थे और यह सभी जानते हैं कि प्रो. हांगलू भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे हैं। विश्वविख्यात रसायनविद एवं प्रतिष्ठि भटनागर अवार्ड से सम्मानित प्रो. खेत्रपाल के चयन पर प्रश्न चिह्न लगाना हास्यास्पद ही नहीं, निंदनीय भी है।