हाईकोर्ट ने कहा है कि इंटर कॉलेजों में प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति हेतु विज्ञापित पदों को माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड घटा नहीं सकता है। बोर्ड को नियमानुसार विज्ञापित पदों के सापेक्ष 25 प्रतिशत अधिक अभ्यर्थियों का पैनल बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मात्र पैनल बनाने से इसमें शामिल सभी लोगों को नियुक्ति पाने का अधिकार नहीं मिल जाता है। नियुक्तियां उपलब्ध पदों के सापेक्ष ही होंगी मगर बोर्ड विज्ञापित पदों में कमी नहीं करेगा।
संजय कुमार और 15 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने पक्ष रखा। चयन बोर्ड ने प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के 909 पदों हेतु विज्ञापित जारी किया था। बाद में इन पदों की संख्या घटाकर 720 कर दी।
याची अधिवक्ता का कहना था कि बोर्ड को विज्ञापित पदों में कमी करने का अधिकार नहीं है बल्कि नियम 12(8) के तहत विज्ञापित पदों के सापेक्ष अधिक अभ्यर्थियों का पैनल गठित होना चाहिए। इस पैनल में चयनित अभ्यर्थियों में सबसे अधिक मेरिट वाले को नियुक्ति दी जाएगी।
चयन बोर्ड के अधिवक्ता का कहना था कि वास्तव में विज्ञापित पदों से भी कम पद सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध हैं। कुल पदों में से बहुत से पद नियमितिकरण आदि में समायोजित हो जाते हैं। बड़ा पैनल बनाने से चयनित सभी उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिल पाती जिससे उनको मायूस होना पड़ता है। इससे बचने के लिए पदों की संख्या में कमी की गई है। कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं थी।
अदालत का कहना था कि चयन बोर्ड नियम 12(8) के तहत चयन प्रक्रिया अपनाने को बाध्य है। बोर्ड को आदेश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर संशोधित पैनल का चयन करे। मगर इस पैनल में से उतने ही अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जाएगी जितने पद उपलब्ध हैं।