अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को बुधवार सुबह सात बजे केंद्रीय कारागार नैनी से भारी सुरक्षा के बीच झांसी जिला जेल भेज दिया गया। माना जा रहा है कि जून में अली की बैरक में पैसा मिलने के बाद ही जेल बदलने की कवायद शुरू हो गई थी।
माफिया अतीक अहमद का बेटा अली अहमद बुधवार दोपहर करीब 2:35 बजे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच झांसी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। झांसी जेल के बाहर मीडियाकर्मियों के सवालों के जवाब में अली अहमद ने आरोप लगाया कि परेशान करने की गरज से उसकी जेल बदली गई।
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नैनी जेल में नियम के साथ रह रहा था। जानबूझकर उसे प्रयागराज से दूर भेजा गया। रास्ते भर में पीने का पानी नहीं दिया गया। छोटी सी गाड़ी में पांच-छह लोगों के बीच ठूंसकर लाया गया।
सीएम योगी से गुहार लगाते हुए अली ने कहा, जो कुछ होना था, हो चुका। अब उसे न सताया जाए। इससे उसे बचा लें। जेल में उसने जान का खतरा बताया। उसने कहा कि जेल में रहते हुए उसके खिलाफ आठ मुकदमे दर्ज किए गए।
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नैनी जेल में अधिवक्ताओं के सिवाय उससे कोई भी मिलने नहीं आता था। जेल में उसके पास मिली नकदी के सवाल पर उसने कहा कि जितनी इजाजत थी, उतना पैसा ही उसके पास था।
प्रयागराज से 14 पुलिसकर्मियों की टीम सुबह करीब सात बजे उसे लेकर निकली थी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार के मुताबिक, सुरक्षा के लिहाज से उसे आंतरिक सेल में रखा गया है। वहीं, वरिष्ठ जेल अफसरों का कहना है कि नैनी जेल में अली से मिलने वालों की संख्या बढ़ने लगी थी। इसके चलते, उसकी जेल बदलने का फैसला किया गया।
चार महीने से लिखी जा रही थी अली के जेल बदलने की पटकथा
मंगलवार की रात शासन से फरमान आते ही अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को बुधवार सुबह सात बजे केंद्रीय कारागार नैनी से भारी सुरक्षा के बीच झांसी जिला जेल भेज दिया गया। माना जा रहा है कि जून में अली की बैरक में पैसा मिलने के बाद ही जेल बदलने की कवायद शुरू हो गई थी।
प्रयागराज निवासी प्रॉपर्टी डीलर जिशान ऊर्फ जानू से पांच करोड़ रुपये रंगदारी मांगने के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद 30 जुलाई 2022 को अली ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उसे उसे नैनी जेल रखा गया था। पहले उसे हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया।
24 फरवरी 2023 को राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या में अली का नाम आने के बाद उसे हाई सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट कर दिया गया। सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
उसके सेल में सीसीटीवी कैमरे के साथ ही बॉडी वार्न कैमरे से तैनात सिपाहियों की ड्यूटी उसके बैरक के बाहर लगाई गई थी। लेकिन जून में अली की बैरक में तलाशी के दौरान पैसा मिलने के बाद से यह बात सामने आई कि जेल में अली की सुरक्षा को लेकर चूक की जा रही थी। मामले में मुख्यालय को रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद से ही जेल स्थानांतरण की कवायद शुरू हो गई थी।
उमेश पाल हत्याकांड का आरोपी है अली
प्रयागराज में बहुचर्चित उमेश पाल हत्याकांड में अली अहमद भी नामजद है। उस पर अतीक अहमद, असद समेत अन्य के साथ मिलकर उमेश पाल की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
अली अहमद 30 जुलाई 2022 से नैनी सेंट्रल जेल में बंद था। वहां उसे हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया था। उसके खिलाफ जमीन कारोबारी जीशान ने पांच करोड़ की रंगदारी मांगने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसके बाद से वह जेल में ही बंद है।
बंदियों के साथ रहने की जताई थी इच्छा
नैनी जेल में अली करीब तीन साल दो महीने रहा। उसके वकील के अलावा उससे कोई मिलने नहीं जाता था। जुलाई में कार्यभार संभालने के बाद डीजी जेल पीसी मीणा यहां निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अली की बैरक को भी देखा था। अली ने उनसे तन्हाई बैरक से हटाकर अन्य बंदियों के साथ रखे जाने की बात कही थी।
दो डिप्टी जेलर, एक वार्डन निलंबित
17 जून को जेल मुख्यालय के अधिकारियों के निर्देश पर अचानक डीआईजी जेल राजेश श्रीवास्तव ने उसके बैरक की तलाशी ली तो उसके पास से 1100 रुपये की नकदी मिली। मामले में दो डिप्टी जेलर एक वार्डन को निलंबित कर दिया गया था। जांच के दौरान ही तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल का भी स्थानांतरण हो गया था।
रात करीब दो बजे उन्हें अली के झांसी स्थानांतरण किए जाने का शासनादेश मिला था। सुबह करीब सात बजे भारी सुरक्षा व्यवस्था में उसे यहां से ले जाया गया है। बैरक से लेकर जेल गेट तक उससे किसी की बात नहीं हुई है।-विजय विक्रम सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक