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दवा कारोबारियों पर शिकंजा

Sun, 31 Jan 2016 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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वाणिज्य कर विभाग ने दवा, रेस्टोरेंट, मिठाई और रेडीमेड कपड़ों के कारोबारियों पर शिकंजा कस दिया है। ऐसी दुकानों, शोरूमों से बड़े पैमाने पर कर की चोरी हो रही है। दवा, मिठाई की दुकानों, रेस्टोरेंट, रेडीमेड कपड़ों की ज्यादातर दुकानें ग्राहकों को पक्की रसीदें नहीं देती और बिक्री कम दिखाकर टैक्स अदा करने से भी बच रहे हैं।
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विभाग ने ज्वाइंट कमिश्नर के नेतृत्व में कर निर्धारण अधिकारियों की टीम बनाई है। सर्वे के नाम पर व्यापारियों के बीच फैली भ्रांति को दूर करते हुए एडिशनल कमिश्नर (एसी) ने साफ किया है कि इस जांच से हर व्यापारी को परेशान होने की जरूरत है। कर चोरी करने वाले जिन व्यापारियों की जांच की भी जा रही है, वे सही बिल दिखाएं, उन्हें भी राहत दी जाएगी।
दवा की बड़ी-छोटी दुकानें हो यहां निजी अस्पतालों में चल रही ऐसी दुकानें, ज्यादातर में ग्राहकों को पक्की रसीद नहीं दी जाती। निजी अस्पतालों में चल रही दवा की दुकानों में एक-एक दिन में लाखों रुपये की दवाएं बिकती हैं। ऐसे में वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर अम्बेश श्रीवास्तव ने पहले चरण में दवा दुकानों की ही जांच शुरू कराई है। विभाग ने ऐसे 14 बड़े दुकानदारों को चिह्नित भी किया है। इसमें निजी अस्पतालों में चल रही दवा की दुकानें भी शामिल हैं। एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में सर्वे का काम एसआईबी करती है लेकिन वर्तमान में ऐसे व्यापारियों की जांच की जा रही है जिनके बिल के आधार पर खरीद-बिक्री में अंतर है।
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उन्होंने बताया कि इसमें बड़ी संख्या में दवा व्यापारी चिह्ंित किए गए हैं, जो माल तो एमआरपी पर बेच रहे हैं लेकिन बिक्री उससे कम पर दिखाते हैं। ज्यादातर दवा दुकानें ग्राहकों को पक्का बिल भी नहीं देती। जल्द ही मिठाई की दुकानों, रेस्टोरेंट के खिलाफ भी जांच शुरू की जाएगी, क्योंकि ज्यादातर दुकानें और रेस्टोरेंट भी बिल नहीं देते। उन्होंने बताया कि किराना, जनरल गुड्स, रेडीमेड कपड़े बेचने वालों को भी चिह्नित किया गया है।
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