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नासी अधिवेशन : वैज्ञानिक डॉ. मुकुल दास बोले- ग्रीन हाइड्रोजन स्वच्छ पर्यावरण के लिए वरदान

Mon, 05 Dec 2022 10:11 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बिजली जब पानी से होकर गुजारी जाती है तो हाइड्रोजन पैदा होती है, जो प्रदूषण मुक्त है। सरकार भी हाइड्रोजन के उत्पादन में तेजी लाने के लिए उद्यमियों को कई तरह की छूट देने की रणनीति बना रही है। भारत सरकार की ओर से प्रस्तावित नई ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी के तहत वर्ष 2030 तक 50 लाख टन हाइड्रोजन बनाने की योजना है।
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For Reference Only - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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ग्रीन हाइड्रोजन भारत के आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और उद्यमियों के लिए वरदान साबित होगी। यह बात श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल रिसर्च, दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. मुकुल दास ने राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) के 92वें अधिवेशन में कही। तीन दिवसीय अधिवेशन के दूसरे दिन आयोजित व्याख्यान में डॉ. मुकुल दास ने कहा कि डीजल एवं पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और वाहनों में इसके उपयोग के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण से ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता प्रबल हो गई है। उन्होंने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन एक तरह की स्वच्छ ऊर्जा है जो रिन्यूवेबल एनर्जी जैसी सोलर पावर का प्रयाग कर पानी को हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन में बांटने से पैदा होती है।

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बिजली जब पानी से होकर गुजारी जाती है तो हाइड्रोजन पैदा होती है, जो प्रदूषण मुक्त है। सरकार भी हाइड्रोजन के उत्पादन में तेजी लाने के लिए उद्यमियों को कई तरह की छूट देने की रणनीति बना रही है। भारत सरकार की ओर से प्रस्तावित नई ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी के तहत वर्ष 2030 तक 50 लाख टन हाइड्रोजन बनाने की योजना है।

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नासी के अध्यक्ष प्रो. अजय घटक ने ग्रीन हाइड्रोजन की प्रदूषण विहीन गुणवत्ता के कारण इसके उत्पादन में तेजी लाने और नए एवं युवा उधमियों को ज्यादा से ज्यादा अवसर देने की बात कही। आईआईटी दिल्ली के प्रो. अनुराग शर्मा ने इस उद्योग में अच्छी तकनीकी जानने वाले कर्मचारियों की जरूरत को देखते हुए युवाओं के लिए रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने पर जोर दिया।


इससे पूर्व परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. केएन व्यास की अध्यक्षता में इसरो के वैज्ञानिक प्रो. एस. सोमनाथ ने स्पेस टेक्नोलॉजी का आईटी के विकास में योगदान पर व्याख्यान दिया। इसके अलावा डॉ. अशोक झुनझुन वाला, प्रो. शांतनु चौधरी, प्रो. सुखदेव रॉय, प्रो. जयंत हरितसा ने व्याख्यान दिए। संचालन डॉ. संतोष शुक्ला एवं धन्यवाद ज्ञापन एनबीआरआई, लखनऊ के निदेशक एसके बारिक ने किया।


पोस्टर के माध्यम से प्रस्तुत किए शोधपत्र
अधिवेशन में शामिल तकरीबन डेढ़ सौ शोधार्थियों और वैज्ञानिकों ने पोस्टर के माध्यम से अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने पोस्टरों का मूल्यांकन किया। 
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