याची के अधिवक्ता ने कहा कि अपराध शिकायतकर्ता के घर में किया गया है, जो सार्वजनिक स्थान नहीं है। ऐसे में एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। हालांकि अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील का विरोध किया, लेकिन कथित घटना शिकायतकर्ता के घर में हुई, इस पर विवाद नहीं कर सके।
कोर्ट ने कहा, सीआरपीसी धारा 161 के बयान और एफआईआर के तहत कथित घटना घर में हुई थी। घटना के दौरान वहां कोई बाहरी व्यक्ति नहीं था। ऐसे में इस मामले में एससीएसटी एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे।