फिल्मों से इतर मुंबई में बहन के पास रहकर ही परीक्षा की तैयारी करते रहे। पहले दो प्रयास में असफलता हाथ लगी, लेकिन हार नहीं मानी। इस दौरान मर्चेंट नैवी में इंजीनियर जीजा अतुल तिवारी ने हौसला बढ़ाया और तीसरे प्रयास में सौरभ ने देश में 62वींं रैंक हासिल कर बाजी मार ली। मां का सपना पूरा हुआ। सौरभ केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में सांख्यिकी अधिकारी बन गए। मां शीला तिवारी और सीओडी छिवकी में सेवारत पिता एसके तिवारी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
पारिवारिक तौर पर जुड़े प्रतापपुर के समाजसेवी शंभूनाथ तिवारी ने भी खुश होकर अपनी बेटी दीपिका का हाथ सौरभ के हाथ में दे दिया है। दीपिका भी हर मोड़ पर सौरभ का संबल बनी रहीं। फिलहाल, कुछ माह पहले ही भुवनेश्वर में नौकरी ज्वाइन कर चुके सौरभ कहते हैं, माता-पिता की सेवा ही मेरा लक्ष्य है। उम्मीद है एक दिन पीसीएस अफसर बनकर भी मां के सपने और चटख रंग दे सकूंगा।
मुंबई में मूंगफली बेची, चौकीदारी तक की
सौरभ बारहवीं के दौरान ही बालाजी टेली फिल्म्स से जुड़े। फिर, निर्देशन में डिप्लोमा हासिल किया। मुंबई में संघर्ष के दौरान मूंगफली बेची। अपार्टमेंट्स में चौकीदारी तक की। मेहनत रंग लाई और कुमार शानू, कैलाश खेर के साथ काम के मौके मिले। पवित्र रिश्ता, पोरस सहित दर्जन भर से ज्यादा धारावाहिकों में भी काम किया। मुंबई में अपना एक स्टुडियो भी खोला था, लेकिन मां का मान रखने के लिए सबकुछ छोड़ घर लौट आए।