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Prayagraj News: जहरीली हुई संगमनगरी की हवा, एक्यूआई 300 पार

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झूंसी। दिवाली के बाद एक बार फिर प्रयागराज की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई है। पिछले दस दिनों से जिले में वायु प्रदूषण लगातार यलो जोन में चल रहा है। सोमवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 पार रहा।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से प्रयागराज में लगाए गए लाइव सेंसर मशीनों ने वायु प्रदूषण खराब श्रेणी यानी यलो जोन में बताया है। झूंसी कार्यालय, मोतीलाल नेहरू एवं नगर निगम कार्यालय पर वायु प्रदूषण की जांच के लिए लाइव सेंसर मशीनें लगाई गई हैं। सोमवार को सबसे खराब स्थिति में सिविल लाइंस की रही। यहां का एक्यूआई 300 के पार रहा। यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।
वहीं, झूंसी का एक्यूआई 287 के साथ खराब श्रेणी में रिकॉर्ड किया गया। वायु गुणवत्ता खराब होने के कारण सबसे बड़ा असर बुजुर्गों एवं अस्थमा के मरीजों पर पड़ रहा है। इसी प्रकार मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज में लगाए गए लाइव सेंसर मशीन में शाम को तकरीबन 8:00 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 269 दर्ज किया गया। यह भी खराब श्रेणी में ही आता है। सीपीसीबी के मुताबिक पीएम-10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के साथ नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, अमोनिया और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसों की मात्रा बढ़ी है।
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यह प्रदूषक मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले धुएं, वाहनों के उत्सर्जन और सड़कों पर जमा धूलकणों से पैदा हो रहे हैं। हवा में पार्टिकुलेट मैटर के बढ़ते स्तर ने लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल कर दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयागराज के क्षेत्रीय अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि कम हवा की गति और बदलते तापमान के कारण प्रदूषण तेजी से नीचे बैठता है, जिससे एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को धुंध छाने के साथ न्यूनतम दृश्यता भी कम रही। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी विजय कुमार का कहना है कि तेज हवा चलने और मौसम साफ होने पर ही वायु प्रदूषण में सुधार की संभावना है।

बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, सांस फूलना, एलर्जी और वायरल संक्रमण जैसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके यादव ने बताया कि रोग कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चे प्रदूषण की मार सबसे पहले झेलते हैं। इसलिए सलाह है कि सुबह और शाम के समय बच्चों व बुजुर्ग बाहर कम निकलें। मास्क का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें। घरों में एयर प्यूरिफायर का उपयोग भी बढ़ाए।
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