संपत्ति को लेकर दंडी संन्यासियों में घमासान
प्रयागराज। घर-परिवार, शिखा-सूत्र का परित्याग और जीते जी खुद का पिंदडान कर दंड धारण करने वाले संन्यासी संगम की रेती पर संपत्ति पर कब्जे के लिए लड़ रहे हैं। रविवार को अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंध समिति के अध्यक्ष स्वामी विमलदेव आश्रम पर ब्रह्मलीन संन्यासियों की संस्थाओं के नाम की भूमि कब्जा कर कल्पवासियों से कमाई करने और मठों की जमीन बेचने का आरोप लगाया गया। वहीं अध्यक्ष के रूप में विमलदेव ने बागी हुए आठ पदाधिकारियों को निष्कासित कर समिति के बैंक खाते से किसी भी तरह के आहरण-वितरण पर रोक लगाने के लिए बैंक प्रबंधक को पत्र जारी किया है।
दंडी संन्यासियों की राष्ट्रीय संस्था के दोनों धड़ों की ओर से अपनी-अपनी ताकत दिखाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। नए धड़े अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम ने कहा कि एक मठ की ओर से दंडी संन्यासियों की संस्था पर एकाधिकार कर लिया गया था। कुछ संन्यासियों ने पुराने धड़े के अध्यक्ष विमलदेव पर ब्रह्मलीन संतों के नाम आवंटित भूमि पर कब्जा कर कल्पवासियों को आवंटित करने और उनसे मोटी रकम वसूलने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि समय आने पर इस तरह की विसंगतियों में सुधार किया जाएगा, ताकि संतों केनाम पर लूट रोकी जा सके।
स्वामी विमलदेव पर वाराणसी समेत अन्य शहरों में स्थापित मछली बंदर मठ व वृंदावन के मठ की भूमि बेचने का भी आरोप लगाया गया। उधर रविवार की शाम पुराने धड़े के अध्यक्ष विमल देव ने समिति के बागी हुए महामंत्री ब्रह्माश्रम, कोषाध्यक्ष शंकरआश्रम समेत आठों पदाधिकारियों को निष्कासित कर उनकी ओर से किसी तरह के लेन-देन या पत्राचार को अवैध करार दे दिया। स्वामी विमल देव ने एचडीएफसी बैंक के प्रबंधक को पत्र लिखकर ब्रह्माश्रम व शंकरआश्रम के हस्ताक्षर से किसी तरह के आहरण पर रोक लगाने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि इन्हीं दोनों पदाधिकारियों के नाम से समिति का बैंक खाता है। ऐसे में वित्तीय अनियमितता हुई तो इसकी जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की होगी। पुराने धड़े की ओर से सोमवार को बुलाई गई साधारण सभा की बैठक में नए सिरे से समिति का गठन किया जाएगा।
मछली बंदर मठ के महंत ने समिति पर कब्जा जमा लिया था। इसे लेकर संन्यासियों में विरोध पैदा हो गया। महंत विमलदेव की ओर से की गई गड़बड़ियों में सुधार के लिए कदम उठाए जाएंगे। -ब्रह्माश्रम, अध्यक्ष- अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद।
देशभर में 1200 से अधिक हैं मठ-मंदिर
दंडी संन्यासियों के देशभर में 1200 से अधिक मठ मंदिर हैं। इसके अलावा दान व चढ़ावा भी आता है। कई मठों के पास करोड़ों की संपत्ति है। हालांकि नए धड़े के अध्यक्ष ब्रह्माश्रम कहते हैं कि उनके पास कोई दान-चंदा नहीं आता। चरखी दादरी हरियाणा और वृंदावन में उन्होंने अपने पैसे से जमीन खरीदकर आश्रम बनाया है। अब उनकी संन्यासी परिषद देशव्यापी अभियान चलाकर संन्यासी परंपरा के मठ मंदिरों के संरक्षण के लिए काम करेगी।
अपने शिष्यों के नाम की भूमि मैंने अपने साथ ही संबद्ध की है। ऐसा ही पूर्व में सभी पीठाधीश्वरों ने किया था। ब्रह्मलीन संतों की भूमि हथियाने व कमाई करने का आरोप निराधार है। स्वार्थ के लिए कीचड़ उछालने और साजिश रचने वालों को निष्कासित कर दिया गया है। अलग समिति का कोई अस्तित्व नहीं है।
विमलदेव- अध्यक्ष, अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंध समिति।