माघ मेले में इस बार रामानुजमार्ग नहीं बन सका है। गंगा की कटान की वजह से काली-त्रिवेणी से मोरी को जोड़ने वाले रामानुज मार्ग का निर्माण न होने से मेला प्रशासन को भूमि प्रबंधन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे इस मार्ग पर बसने वाली सौ से अधिक संस्थाएं विस्थापित हो गई हैं। इन संस्थाओं को दूसरी जगह बसाया जा रहा है। संगम की रेती पर छह सेक्टरों में बसने वाले माघ मेले में इस बार रामानुजनगर तो होगा, लेकिन रामानुज मार्ग लोग ढूंढते रह जाएंगे। यह मार्ग इस बार गंगा की कटान में विलीन हो गया है। इससे जहां कई संस्थाओं को बसाने में मशक्कत करनी पड़ रही है, वहीं विस्थापन की भी मार से संत-श्रद्धालु प्रभावित हुए हैं। सबसे बड़ी दिक्कत इस मार्ग पर परंपरागत तरीके से बसने वाली संस्थाओं को हुई है। रामानुज मार्ग मेले का आकर्षण बनता रहा है। इस मार्ग पर कई प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविर लगते थे, लेकिन अब उन्हें शिफ्ट किया जा रहा है। मोरी मार्ग से भी कई संस्थाओं को विस्थापित होना पड़ा है।