लंबी दूरी की बसों में आरामदायक सीट और अन्य सुविधाएं यात्रियों को आकर्षित करता है लेकिन किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बस में इंतजाम पूरे हैं या नहीं, इसकी जांच नहीं की जाती है। फायर सेफ्टी के इंतजाम, प्राथमिक उपचार की सुविधा, निकासी द्वार के बारे में जांच नहीं होती है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस हादसे के बाद प्रदेश में आरटीओ विभाग 28, 29 व 30 सितंबर को ऑपरेशन कवच 2.0 अभियान चलेगा। जिसमें सभी निजी बसों में सुरक्षा मानक सहित अन्य यातायात नियमों को परखा जाएगा। इनमें लंबी रूट व छोटे रूटों की बसें शामिल हैं।
लंबी दूरी की बसें ज्यादातर रात में ही चलती हैं। ऐसे में यात्रा आरामदायक हो जाती है। आरटीओ की जांच में अधिकांश बसों के परमिट, रजिस्ट्रेशन देखा जाता है। इसके अलावा सीटों की क्षमता से अधिक सवारी बैठाने पर भी जुर्माना होता है मगर बसों में सुरक्षा के इंतजाम के प्रति उदासीनता देखने को मिलती है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर बस हादसे के बाद आरटीओ प्रशासन एसपी सिंह ने बताया कि बसों में सुरक्षा के सारे इंतजाम होते हैं। इसकी समय-समय पर जांच होती है। बसों की फिटनेस के सभी मानकों को परखा जाता है। कई बार फिटनेस के समय फायर फाइटिंग सिस्टम व अन्य मानक पूरे दिखाए जाते हैं मगर बाद में उन्हें हटा दिया जाता है। इसकी समय-समय पर जांच होती है।
वहीं, शहर में छोटे रूटों के लिए संचालित हो रही डग्गामार बसों में भी मानकों का अभाव रहता है। वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, मिर्जापुर, सुल्तानपुर सहित कई अन्य मार्गों पर बिना परमिट के इन बसों का संचालन हो रहा है। इन बसों में यातायात से संबंधित सभी मानक पूरे हैं कि नहीं, इसका भी कुछ अता-पता नहीं है। ऐसे में यात्रियों की जान हमेशा मुश्किल में रहती है।