पुलिस किस आधार पर खोलती है हिस्ट्रीशीट
जब व्यक्ति एक से अधिक बार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो एसएचओ एसएसपी या एसपी को रिपोर्ट भेजकर अपराधी की हिस्ट्रीशीट खोलने की अनुमति मांगता है। हिस्ट्रीशीट में उसका पूरा ब्योरा होता है। दोस्तों से लेकर ज्ञात रिश्तेदारों की जानकारी भी होती है। इसके अलावा ऐसे मामले जब लोग संगठित रैकेट चलाने या जबरन वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस से संपर्क करने से डरते हैं तो भी पुलिस स्थानीय स्रोतों की मदद से ऐसे अपराधियों पर नजर रखती है।
पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल और डेली डायरी एंट्री के आधार पर, ऐसे व्यक्तियों की हिस्ट्रीशीट खोली जा सकती है जो समाज के लिए खतरा हैं। हिस्ट्रीशीटर की दो श्रेणी होती है। श्रेणी ए में चोरी, लूट, डकैती से संबंधित अपराधी होते हैं। वहीं, बी श्रेणी में पेशेवर अपराधियों को रखा जाता है। हिस्ट्रीशीट खोले जाने के बाद अपराधी सतत निगरानी में रहता है। उसे नियमित रूप से थाने में उपस्थिति दर्ज करानी होती है।
डीजी मुख्यालय से जारी आदेश का भी पालन नहीं
इसी साल 14 अप्रैल को तत्कालीन डीजीपी राजकुमार विश्वकर्मा की ओर से सर्कुलर जारी कर अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोले जाने के संंबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए थे। निर्देशित किया गया था कि पेशेवर अपराधी, माफिया व ऐसे अपराधी जो संगठित अपराधों, गिरोहों के सरगना या सदस्य हों, उनकी हिस्ट्रीशीट खोली जाए। इसके साथ ही क्रियाशील अपराधियों की हिस्ट्रीशीट सात दिन के भीतर खोलने के भी निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद सद्दाम की हिस्ट्रीशीट नहीं खोली जा सकी।