विभाग, रिकॉर्ड और डिजिटल सिस्टम तक पहुंच पर रोक
निलंबन अवधि में डॉ. शर्मा को विश्वविद्यालय के विभागों, छात्रावासों, अभिलेखों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और डेटाबेस तक पहुंच नहीं होगी। उन्हें प्रतिदिन रिसेप्शन काउंटर पर रखे रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करानी होगी। बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर भी रोक रहेगी। मामले की आगे जांच के लिए समिति गठित की जाएगी।
कुलपति ने शासन से मांगा हस्तक्षेप, कुलसचिव पर भी गंभीर आरोप
दूसरी ओर विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच प्रशासनिक अधिकारों को लेकर चल रहा विवाद भी शासन तक पहुंच गया है। कुलपति प्रो. उषा टंडन ने अपर मुख्य सचिव, नियुक्ति व कार्मिक विभाग को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में कुलसचिव वरुण कुमार पांडेय पर प्रशासनिक निर्देशों का अनुपालन नहीं करने और अपेक्षित सहयोग नहीं देने का आरोप लगाया गया है।
कुलपति के मुताबिक कुलसचिव के अवकाश के दौरान उनका कार्यभार परीक्षा नियंत्रक को सौंपा गया था लेकिन कार्यालय की चाबी अधिकृत अधिकारी को नहीं सौंपी गई। आधिकारिक ई-मेल और डिजिटल अभिलेखों तक संस्थागत पहुंच को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात पत्र में कही गई है। कुलपति ने महत्वपूर्ण पत्राचार और डिजिटल रिकॉर्ड में किसी तरह के बदलाव की आशंका जताते हुए संबंधित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
वहीं कुलसचिव ने 26 सितंबर को जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 14 दिन के चिकित्सा अवकाश का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने के लिए संबंधित अभिलेखों का अध्ययन आवश्यक है। ड्यूटी पर लौटने के बाद वह विस्तृत जवाब देंगे। विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्तर पर चल रहा यह घटनाक्रम रविवार को प्रस्तावित इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो मौजूदा न्यायाधीशों के विश्वविद्यालय दौरे से पहले सामने आया है।