अधूरा ही रह गया वीर बहादुर का वादा
महादेवी के संदर्भ में यह हैरत की बात है कि प्रकाशक ही नहीं सरकार की ओर से भी आर्थिक सहयोग की अनदेखी की गई। 11 सितंबर 1987 को देहावसान के बाद रसूलाबाद घाट पर जब महादेवी की अंत्येष्टि हो रही थी तो प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने भी पहुंचकर उनकी स्मृतियों को संजोए रखने के लिए सहकार न्यास को दस लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था। तीन दशक बीत गए, यह वादा पूरा हो सका।