इलाहाबाद। दंगाई के हाथ में भगवा झंडा थमाना यूपी पुलिस को महंगा पड़ गया। साथ ही विपक्ष को भी प्रदेश सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया। पुलिस लाइन में शुक्रवार को आयोजित दंगा नियंत्रण की रिहर्सल एक बड़े विवाद का कारण बन गई। गुजरात में रिहर्सल के दौरान दंगाइयों के सिर पर टोपी गुजरात सरकार के गले की हड्डी बनी तो इलाहाबाद में दंगाई के हाथ में लहराते भगवा झंडे ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। रिहर्सल के थोड़ी ही देर बाद विवाद इतना बढ़ गया कि भाजपाई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) सहित तमाम हिंदू संगठनों के लोग सड़क पर उतर आए। विहिप के लोगों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पुतला भी फूंका। पुलिस के आला अधिकारी इस घटना को महज एक इत्तेफाक मान रहे हैं।
हफ्ते भर पहले शहर में तैनात पुलिस कर्मियों के लिए दंगा नियंत्रण की रिहर्सल कराई गई थी। शुक्रवार को पुलिस लाइन में यमुनापार की पुलिस के लिए रिहर्सल का आयोजन किया गया, जिसमें यमुनापार के थानेदार, सीओ और एसपी यमुनापार शामिल हुए। रिहर्सल के दौरान दंगाई की भूमिका में एक पुलिस कर्मी ने हाथ में भगवा झंडा पकड़ रखा था। भीड़ में शामिल यह दंगाई पुलिस वालों को छका रहा था और पुलिस वाले उसे खदेड़ रहे थे। रिहर्सल के बाद आयोजन की फोटो सार्वजनिक होते ही बखेड़ा खड़ा हो गया।
पूरे मामला राजनीतिक हो गया। भाजपाइयों, विहिप कार्यकर्ताओं सहित अन्य हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि पुलिस के आला अधिकारियों ने प्रदेश सरकार को खुश करने के लिए जानबूझकर दंगाई के हाथ में भगवा रंग का झंडा थमाया। विरोध बढ़ने पर भाजपाई और विहिप कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विहिप कार्यकर्ताओं ने सिविल लाइंस सुभाष चौराहे पर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पुतला भी फूंका। इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस ने झड़प हुई और पुलिस कर्मियों ने कार्यकर्ताओं के हाथ से पुतला छीनने की कोशिश की। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद अफसर सफाई देने में लग गए हैं। उनका कहना है कि दंगाई के हाथ में भगवा झंडा एक हत्तेफाक है। यह जानबूझकर नहीं किया गया। उधर, विहिप नेता पवन श्रीवास्तव ने इसे प्रदेश सरकार को खुश करने के लिए एसएसपी की साजिश करार दिया है। उन्होंने संबंधित पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
‘यह पुलिस की रुटीन प्रैक्टिस का हिस्सा है। रिहर्सल में पुलिसवाले ही दंगाई बने थे। पुलिस कई रंग के झंडों का प्रयोग करती है। यह महज इत्तेफाक था कि रिहर्सल में भगवा रंग के झंडे का प्रयोग हुआ। किसी समुदाय या वर्ग से जुड़े लोगों की भावना को ठेस पहुंचाना हमारा उद्देश्य नहीं था।’ केएस इमैनुएल, एसएसपी इलाहाबाद
‘इस घटना से सपा की हिंदू विरोधी छवि उजागर हुई है। ऐसा लग रहा है कि प्रदेश सरकार की बागडोर अखिलेश नहीं, आजम के हाथ में है। भगवा त्याग का प्रतीक है। इस पूरे प्रकरण के पीछे कौन है, इसकी जांच होनी चाहिए।’ केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा सांसद