होलिका दहन के मौके पर ईंट-बालू-मिट्टी का बेस न बनाए जाने से शहर की सड़कें घायल हो गई हैं। होलिका के साथ शहर की सड़कें भी जली हैं। निर्देशों पर अमल न करने का परिणाम रहा कि ठीकठाक सड़कों और चौराहों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। तारकोल जलने से कहीं-कहीं उखड़ी गिट्टियां हादसे का कारण बन रही हैं।
होलिका दहन के लिए लोगों ने मिट्टी और बालू का प्लेटफार्म बनाने में कोताही बरती है। नगर निगम के अफसर इस ओर से लापरवाह बने रहे। वही हुआ जिसका अंदेशा था। शहर की सड़के और चौराहे पर होलिका दहन के बाद आग की आंच से खराब हो गए।
प्रशासन के पास जिले में 3700 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन की सूचना थी। इनमें से करीब 1000 होलिकाएं शहर में हैं। शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़कों और गलियों की हालत कुछ ज्यादा ही खराब हुई है। महापौर अभिलाषा गुप्ता और जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने नगर आयुक्त को निर्देश दिए थे कि होलिका स्थलों की जांच कराएं और आयोजकों से ईंट का बेस बनाकर ही होलिका दहन कराना सुनिश्चित कराएं, जो नहीं किया गया। महापौर अभिलाषा ने दो दिन में खराब हुई सड़कों, चौराहों को चिह्नित कराकर एक सप्ताह में मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं।
होलिका दहन के दौरान आग की उठतीं लपटों के चलते शहर के कई मोहल्लों में बिजली के तार और केबल में आग लग गई। कई स्थानों पर होलिका तारों के नीचे लगा दी गई थी। ऐसे में सोमवार को जब होलिका में आग लगाई गई तो थोड़ी देर बाद भड़की आग और ऊंची उठती लपटों से तार जले। शार्ट सर्किट से लाइन ट्रिप कर गई। इससे विद्युत आपूर्ति बाधित हुई। कीडगंज, अल्लापुर, अलोपीबाग, सोहबतियाबाग, दारागंज, मालवीय नगर, करेली के बड़े इलाके में होलिका दहन की रात केबल और बिजली का तार जलने से दस और 11 मार्च को होली वाले दिन मंगलवार और बुधवार को बिजली आपूर्ति घंटों ठप रही। बिजली कटौती से लोगों को होली खेलने के बाद पानी के लिए परेशान होना पड़ा। होली का अवकाश होने के कारण कई मोहल्लों में तो मरम्मत कार्य भी बाधित हुआ। बिजली की आंख मिचौली का क्रम दिन ही नहीं रात में भी जारी रहा।