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144 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी में फंसे पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर हिमांशु मित्तल

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बरेली/प्रयागराज। साल भर पहले तक बरेली में तैनात रहे पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल के खिलाफ सड़कों केअनुबंधों की स्वीकृति में नियमों की अनदेखी कर अरबों रुपये की वित्तीय अनियमितता करने का मामला सामने आया है। शासन से गठित जांच टीम की रिपोर्ट में सामने आया है कि बरेली और आगरा में तैनाती के दौरान मित्तल ने सड़कों के निर्माण में खुलकर मानकों की अनदेखी की। बरेली में तैनाती के दौरान मित्तल का नाम बरेली-बदायूं रोड के निर्माण में भी करोड़ों का घपला करने समेत कई घोटालों में चर्चा में रहा।
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हिमांशु मित्तल फिलहाल प्रयागराज में पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हैं। उन्हें अकेले बरेली क्षेत्र में ठेका फर्मों की मिलीभगत से 144 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद यूपी के भ्रष्ट अधिकारियों की सूची में शामिल किया गया था। हालांकि इसके बावजूद ऊंची पहुंच के चलते उन्हें प्रयागराज में विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक-धार्मिक आयोजन कुंभ का मेला कराने की जिम्मेदारी दे दी गई थी। कुंभ के दौरान बनाई गई 44 सौ किमी से ज्यादा लंबी सड़कों के निर्माण में करोड़ों का घपला होने की आशंका जताई जा रही है।
बरेली क्षेत्र में तैनाती केदौरान हिमांशु मित्तल को वर्ष 2016 में 45 किमी लंबे मेरठ-बदायूं राजमार्ग के चौड़ीकरण-सुदृढ़ीकरण कार्य के अनुबंध गठन में अनुचित लाभ लेकर 1.44 अरब, 19 लाख, 92 हजार 77 रुपये 40 पैसे की स्वीकृति देने का दोषी पाया गया है। जांच के दौरान पाया गया है कि मित्तल ने टी-2 के तहत गठित अनुबंध के विरुद्ध सीमा से अधिक जाकर वित्तीय स्वीकृति प्रदान की और शासन के नियमों का उल्लंघन किया। इसमें राजकीय कार्र्यों के प्रति उदासीनता के साथ पद व दायित्वों का निर्वहन न करते हुए कदाचार के लिए उन्हें उत्तरदायी ठहराया गया है। बरेली के मुख्य अभियंता रहे राकेश राजवंशी की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मित्तल से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में मित्तल का जिक्र अपचारी अधिकारी के रूप में किया है।
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गौरतलब है कि अपनी तैनाती के दौरान वर्ष 2016-17 में 280 करोड़ से बनी बरेली-बदायूं करोड़ निर्माण के घोटाले में भी हिमांशु मित्तल फंसे हैं। शिकायत है कि पुरानी सड़क के मलबे को नई रोड में इस्तेमाल करने सहित बड़े स्तर पर घपलेबाजी हुई। इसमें इन पर 14 करोड़ की रिकवरी के आदेश भी हुए थे। शासन स्तर पर अभी इस मामले की जांच चल रही है। इस मामले में हिमांशु मित्तल को हटाया भी गया था लेकिन वर्ष 2018 में वह फिर कुछ समय के लिए यहां तैनात रहे। शाहजहांपुर रिंग रोड के करीब 71 करोड़ के प्रोेजेक्ट में भी उनका चहेते ठेकेदारों को कांट्रेक्ट देने के लिए नाम चर्चा में रहा। इसके अलावा बरेली-बीसलपुर, मुरादाबाद-फर्रुखाबाद सहित कई दूसरे बड़े सड़क प्रोजेक्ट में भी ठेके देने के मामलों में भी हिमांशु मित्तल घिर चुके हैं।

प्रयागराज क्षेत्र के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल के विरुद्ध गठित जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई किस स्तर पर पहुंची है, इस पर पत्रावली देखे बिना कुछ नहीं कह सकता। वीके सिंह, प्रमुख अभियंता, लखनऊ।
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