आरओ/एआरओ प्रश्नपत्र भोपाल की प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था। कर्मचारी की मदद से राजीव नयन एंड कंपनी ने सेंध लगाई थी। परीक्षा से आठ दिन पहले ही प्रश्नपत्र प्रेस से बाहर निकाल लिया था। एसटीएफ ने मामले का खुलासा करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
उप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सेंधमारी कर जिस गिरोह ने पूरे सूबे में भूचाल ला दिया, उसके तार देश के चार अलग-अलग राज्यों से जुड़े हैं। इनमें यूपी के अलग-अलग जनपदों के साथ बिहार, मप्र व हरियाणा भी शामिल है। खास बात यह है कि गिरोह के जिन 18 सदस्यों के नाम अब तक सामने आए हैं उनमें से सात प्रयागराज के हैं।
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गिरोह का सरगना राजीव नयन प्रयागराज के मेजा स्थित बरवा शुकुलपुर गांव का रहने वाला है। इसके अलावा परीक्षा वाले दिन यानी 11 फरवरी को कटरा स्थित बिशप जॉनसन गर्ल्स कॉलेज से पेपर लीक कराने वाला स्कूल मैनेजर कमलेश पाल झूंसी का रहने वाला है।
जिस केंद्र व्यवस्थापक (बिशप जॉनसन गर्ल्स कॉलेज) अर्पित विनीत यशवंत की मदद से पेपर कमलेश ने लीक कराया, वह नगर के ही म्योराबाद मोहल्ले का रहने वाला है। इसके अलावा रविवार को गिरफ्तार किया गया विशाल दुबे मेजा व संदीप पांडेय पनासा करछना का रहने वाला है।
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विशाल ही वह व्यक्ति है जिसने अपने पूर्व के संबंध का फायदा उठाकर प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारी सुनील रघुवंशी को रुपयों का लालच देकर पेपर लीक करने के लिए राजी किया। जबकि संदीप भोपाल स्थित उस कोमल होटल में अभ्यर्थियों को लेकर पहुंचा जहां पेपर सॉल्व कराया और रटवाया गया। इसके अलावा इस प्रकरण में मेजा निवासी पुष्कर पांडेय और झूंसी निवासी कामेश्वर मौर्य की भी तलाश की जा रही है।
पेपर निकालने वाला मप्र तो सॉल्वर बिहार का
गिरोह में यूपी के अलावा बिहार, मप्र व हरियाणा के सदस्य भी शामिल हैं। गौरतलब है कि प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र बाहर निकालने वाला सुनील भोपाल मप्र का रहने वाला है। इसी तरह पेपर सॉल्व करने के साथ साथ योजना बनाने वाला सुभाष प्रकाश मुधबनी, बिहार का रहने वाला है। पूर्व में ही जेल भेजा जा चुका विक्रम पहल हरियाणा का रहने वाला है।
पैटर्न से लगा था अनुमान, किस परीक्षा का है पेपर
पेपर लीक प्रकरण में एक खास बात यह भी रही कि कुख्यात राजीव नयन ने महज पेपर पैटर्न से ही यह अनुमान लगा लिया था कि प्रश्नपत्र आरओ/एआरओ परीक्षा से संबंधित है। उसे प्रिटिंग प्रेसकर्मी सुनील ने सिर्फ दोनों प्रश्नपत्रों में प्रश्नों की संख्या बताई थी। इसके आधार पर ही उसने परीक्षा का अनुमान लगा लिया और अपने साथियों विशाल व सुभाष को पेपर लीक कराने में लगा दिया था।
दरअसल आयोग या अन्य किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सिर्फ लिफाफे पर कोड ही अंकित होता है। इसमें यह कहीं नहीं लिखा होता कि प्रश्नपद्ध किस परीक्षा से संबंधित है। सुनील ने भी विशाल को यही बताया कि यूपी की किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र छपाई के लिए आया है। लेकिन वह यह नहीं बता सका कि परीक्षा कौन सी है। विशाल ने जब यह बात राजीव नयन को बताई तो उसने उसे सुनील से यह पूछने को कहा कि पेपर का पैटर्न क्या है।
विशाल के पूछने पर सुनील ने बताया कि एक प्रश्नपत्र में 140 व दूसरे प्रश्नपत्र में 40 प्रश्न हैं। विशाल ने इसकी जानकारी दी तो राजीव नयन ने तुरंत अनुमान लगा लिया कि पेपर आरओ/एआरओ भर्ती परीक्षा से संबंधित है।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, दरअसल उन दिनों समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी के पदों पर भर्ती परीक्षा के लिए प्रक्रिया चल रही थी। पूर्व के पैटर्न के अनुसार, इस परीक्षा के एक प्रश्नपत्र में 140 व दूसरे में 40 प्रश्न ही पूछे जाते हैं। इसी आधार पर राजीव नयन ने अनुमान लगा लिया।