प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने बुधवार को अभ्यर्थियों की तमाम शिकायतें सुनीं और उनके निस्तारण का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान अभ्यर्थियों ने आरओ-एआरओ परीक्षा के प्रश्नपत्र आउट होने की जांच जारी होने के बावजूद उत्तरकुंजी जारी करने पर सवाल उठाए। इसके जवाब में अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने सीबीसीआईडी जांच करवाई और सरकार की अनुमति पर ही उन्होंने आरओ-एआरओ परीक्षा की उत्तरकुंजी जारी की है। पदभार ग्रहण करने के बाद लगातार तीसरे सप्ताह प्रतियोगी छात्रों और आम लोगों से अध्यक्ष ने मुलाकात की। इस दौरान 29 लोगों ने परीक्षाओं में धांधली की जांच, परीक्षा परिणाम में देरी की शिकायत और मुख्य परीक्षा की तिथि घोषित करने जैसी मांग रखी।
पीसीएस परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की शिकायतें सुनने के बाद अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि पीसीएस- 2018 की मुख्य परीक्षा अक्तूबर में कराए जाने की कोशिश होगी, जबकि पीसीएस-2017 मुख्य परीक्षा का परिणाम नवंबर तक घोषित किया जाएगा। इस दौरान राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा में धांधली की शिकायत भी की गई। राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा 2013 में शामिल अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि लिखित परीक्षा का परिणाम दो फरवरी 2019 को घोषित किया गया था। इसमें 2086 सिविल इंजीनियरिंग के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। 625 सिविल इंजीनियरिंग के अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से तीन मई 2019 को घोषित परिणाम में सफल कर दिया गया। प्रतियोगियों ने अध्यक्ष को दिए लिखित प्रत्यावेदन में कहा कि देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेजों से बीटेक, एमटेक करने के बाद उन्हें सफलता नहीं मिली, जबकि साक्षात्कार एवं मॉडरेशन के नाम पर नंबर में हेरफेर करके कम नंबर पाने वालों को सफल घोषित कर दिया गया। अभ्यर्थियों ने आयोग अध्यक्ष से पूरी परीक्षा की जांच की मांग की। मांग करने वालों में अभिषेक सिंह चौहान, अभिषेक कुमार, दानवेंद्र सिंह, शंकर दयाल मिश्र सहित कई प्रतियोगी शामिल रहे।