इलाहाबाद। शहर से राष्ट्रीय जलमार्ग प्राधिकरण का दफ्तर और इसके कर्मचारी कहीं नहीं जा रहे है। केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद से ही मचे इस शोर को अब विराम लग सकता है। सांसद केशव प्रसाद मौर्य के सवाल उठाने और विरोध जताने पर केंद्रीय मंत्री ने साफ किया है कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। केंद्रीय मंत्री की चिट्ठी के बाद यह संभावना भी बढ़ गई है कि अगले वित्तीय वर्ष से वाराणसी से इलाहाबाद के बीच भी गंगा की गहराई बढ़ाने के कार्य शुरू हो सकते हैं।
राष्ट्रीय जलमार्ग प्राधिकरण एक के तहत मोदी सरकार गंगा के जरिए परिवहन की सुविधाएं बढ़ाने के लिए कार्य शुरू कर चुका है। वाराणसी से पटना के बीच गंगा की धारा में न्यूनतम तीन मीटर की गहराई रखने, वाराणसी में टर्मिनल और माल के लोडिंग-अनलोडिंग सुविधाओं के विकास के कार्य भी जल्द ही जमीन पर दिखने लगेंगे। इस बीच इलाहाबाद स्थित जलमार्ग प्राधिकरण के वाराणसी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में मर्जर और कर्मचारियों के स्थानांतरण की चर्चा भी शुरू हो गई। कर्मचारियों को आशंका थी कि इससे वाराणसी से इलाहाबाद के बीच जलमार्ग के विकास की योजना को भी झटका लग सकता है।
शहर की एक बड़ी योजना पर संकट मंडराते देख सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को चिट्ठी लिखकर ऐतराज जताया था। कैबिनेट मंत्री ने सांसद को चिट्ठी लिखकर यह बताया है कि इलाहाबाद में तैनात किसी भी स्टाफ का वाराणसी स्थानांतरण नहीं होगा।
गडकरी ने लिखा है कि केंद्र सरकार ने हल्दिया से इलाहाबाद तक 1500 मीट्रिक टन से अधिक जलयानों के लिए जलमार्ग विकास योजना के तहत गंगा नदी विकास के कार्य शुरू कर दिए हैं। यह कार्य छह वर्षों में पूरा हो जाएगा। इसके बाद कम से कम तीन मीटर की गहराई मिलेगी। इससे 1500 टन डीडब्ल्यूटी जलयान के जरिए नौचालन संभव हो सकेगा। फिलहाल, सूत्रों का दावा है कि योजना के पहले चरण में हल्दिया-वाराणसी के बीच ही कार्य होने हैं।