इलाहाबाद। कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के भाजपा में शामिल होने के बाद इलाहाबाद शहर की उत्तरी और दक्षिणी विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव की टिकट पाने की जुगाड़ में लगे प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके ज्वाइन करने के बाद ही इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि पार्टी उन्हें इलाहाबाद की उत्तरी या दक्षिणी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा सकती हैं। इसके पीछे तमाम तर्क भी दिए गए।
रीता जोशी वर्तमान समय लखनऊ कैंट से विधायक है। अंदरखाने में चर्चा है कि वह अपने बेटे मयंक को भी सक्रिय राजनीति में लाना चाह रही थी। लेकिन कांग्रेस की टीम पीके ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। इसी के बाद से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से उनके मतभेद की बात सामने आने लगी। सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही रीता की भाजपा ज्वाइन करने की अटकलें लगाई जा रही थीं। फिलहाल उन्होंने बृहस्पतिवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा ज्वाइन कर ली। रीता जोशी इलाहाबाद की दक्षिण विधानसभा से चुनाव लड़ चुकी हैं। हालांकि वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा की सोशल इंजीनियरिंग की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब भाजपा का दामन थामने के बाद पार्टी का एक गुट दोपहर बाद से ही प्रचार करने में जुट गया कि वह इलाहाबाद से चुनाव लड़ सकती हैं। इस चर्चा के बाद शहर दक्षिण और उत्तरी के तमाम नेताओं की बेचैनी बढ़ गई। कुछ ने इसकी पुष्टि के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी संपर्क भी साधा। दरअसल भाजपा से इस बार उत्तरी और दक्षिणी विधानसभा सीट से काफी संख्या में पार्टी नेताओं ने टिकट के लिए आवेदन किया है। इसमें से कुछ नेता ऐसे भी है जो अन्य दलों को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। इस बारे में भाजपा के नगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कौन उम्मीदवार कहां से चुनाव लड़ेगा, उसका फैसला पार्टी का प्रदेश नेतृत्व करेगा। भाजपा की विचारधारा और पीएम मोदी के कामकाज से प्रभावित होकर ही रीता जोशी ने पार्टी ज्वाइन की है। उनका सभी ने स्वागत किया है।