इसके अलावा दोपहर डेढ़ बजे तक पढ़ने वाले छात्रों की उपस्थिति भी दर्ज नहीं की गई थी। इसे अत्यंत लापरवाहीपूर्ण मानते हुए प्रधानाध्यापिका को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया। इसके बाद दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपने पारित विस्तृत आदेश में कोर्ट ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए उद्धित किया गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा:, गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नम:।
शिक्षकों के स्कूलों में न जाने से बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गरीब बच्चे प्राइवेट ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते। शिक्षकों की गैरहाजिरी के चलते स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति दिनों दिन कम होती जा रही है। बच्चे ही देश के भविष्य हैं। हाईकोर्ट इस याचिका पर 30 अक्तूबर को पुनः सुनवाई करेगा।