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High Court : गुरु के बिना शिक्षा का अधिकार अधूरा, कोर्ट ने विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति पर जताई चिंता

Sun, 19 Oct 2025 02:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। कहा कि यह प्रवृत्ति बच्चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। गुरु के बिना शिक्षा का अधिकार अधूरा है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। कहा कि यह प्रवृत्ति बच्चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। गुरु के बिना शिक्षा का अधिकार अधूरा है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने बांदा के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक इंदिरा देवी को निलंबन आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर राहत देने से इन्कार कर दिया।

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कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा), महानिदेशक स्कूल शिक्षा, निदेशक बेसिक शिक्षा और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस नियम बनाएं और डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करें। कोर्ट ने कहा अदालत शिक्षकों की अनुपस्थिति से जुड़े मामलों से भर गई है। यदि शिक्षक स्कूल में उपस्थित ही नहीं रहेंगे तो ग्रामीण गरीब बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
यह है मामला

30 अगस्त को बांदा के डीएम ने दोपहर में उच्च प्राथमिक विद्यालय पायलानी कंपोजिट, क्षेत्र तिंदवारी का निरीक्षण किया। उस दौरान इंदिरा देवी नहीं थीं जबकि उपस्थिति पंजिका में उनके सुबह के हस्ताक्षर थे। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि अधिकांश स्टाफ ने बिना किसी सूचना के या विभागीय नियमों के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से कोई अवकाश नहीं लिया था। वहीं, किसी भी स्टाफ की ओर से ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अवकाश संबंधी कोई विवरण दर्ज नहीं किया गया था।

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इसके अलावा दोपहर डेढ़ बजे तक पढ़ने वाले छात्रों की उपस्थिति भी दर्ज नहीं की गई थी। इसे अत्यंत लापरवाहीपूर्ण मानते हुए प्रधानाध्यापिका को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया। इसके बाद दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपने पारित विस्तृत आदेश में कोर्ट ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए उद्धित किया गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा:, गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नम:।

शिक्षकों के स्कूलों में न जाने से बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गरीब बच्चे प्राइवेट ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते। शिक्षकों की गैरहाजिरी के चलते स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति दिनों दिन कम होती जा रही है। बच्चे ही देश के भविष्य हैं। हाईकोर्ट इस याचिका पर 30 अक्तूबर को पुनः सुनवाई करेगा।
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