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फुटकर न मिलने से रिजर्वेशन कराने गए यात्री भड़के

Thu, 10 Nov 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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पांच सौ और एक हजार के नोट बंद कर दिए जाने का सीधा असर बुधवार को इलाहाबाद जंक्शन पर दिखा। यहां रिजर्वेशन कराने आए यात्रियों को फुटकर पैसे की खासी किल्लत झेलनी पड़ी। इस आपाधापी में रिजर्वेशन काउंटर पर दिन में 12 बजे के बाद वहां बैठे बुकिंग क्लर्क से यात्रियों की झड़प हो गई। यात्री हर हाल में रिजर्वेशन करवाना चाह रहे थे, लेकिन काउंटर पर फुटकर पैसे खत्म हो जाने से समस्या बढ़ गई। मामले की जानकारी रेलवे के आला अफसरों को मिली तो मौके पर सीनियर डीसीएम  बीके मिश्रा आदि को पहुंचना पड़ा। यहां यात्रियों को आश्वस्त किया गया कि सभी का रिजर्वेशन किया जाएगा। 
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इलाहाबाद जंक्शन रिजर्वेशन काउंटर पर आम दिनों के मुकाबले सुबह यात्रियों की कुछ ज्यादा ही भीड़ रही। दरअसल केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को ही स्पष्ट किया गया था ट्रेन रिजर्वेशन में 11 नवंबर तक 500 और 1000 के नोट लिए जाएंगे। रिजर्वेशन कराने आए अधिकांश यात्री बड़े नोट लेकर ही जंक्शन पहुंचे। इस वजह से सुबह फुटकर पैसे की काफी समस्या आई। 12 बजते-बजते समस्या कुछ ज्यादा ही हो गई। बुकिंग क्लर्क भी खासे परेशान हो गए कि वे क्या करें। इस वजह से कुछ देर रिजर्वेशन का कार्य भी बाधित हुआ। इस दौरान यात्री शोरशराबा करते रहे।

मामला बढ़ता देख रेलवे के अफसरों को इसकी खबर कर दी गई। थोड़ी ही देर में सीनियर डीसीएम बीके मिश्र आदि अफसर मौके पर पहुंच गए। अफसरों ने भी पाया कि कांउटर पर फुटकर पैसे की समस्या है। यहां यात्रियों को आश्वस्त कराया गया कि वे परेशान न हो। सभी का रिजर्वेशन किया जाएगा। इसके लिए वे थोड़ा सहयोग दें। इस दौरान जैसे-जैसे फुटकर पैसा आता गया वैसे-वैसे यात्रियों को उनके टिकट की बची हुई रकम वापस की जाने लगी। 
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500 और 1000 के नोट के चक्कर में बुधवार को यात्री घनचक्कर बने रहे। बड़े नोट बंद हो जाने की वजह से रोडवेज में अन्य दिनों के मुकाबले यात्रियों की संख्या कम हो गई। बहुत से ऐसे यात्री रहे जो बड़े नोट लेकर चले। रास्ते में टिकट बनवाने के बाद यात्रियों की संबंधित बसों के कंडक्टर से भी खूब झड़प हुई। कई कंडक्टरों ने यात्रियों द्वारा मारपीट की शिकायत रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक डा. हरिशचंद्र यादव से भी की है। क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि रोडवेज की बसों में 11 नवंबर की रात 12 बजे तक बड़े नोट स्वीकार किए जाएंगे। हालांकि फुटकर पैसा न होना एक बड़ी समस्या है। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि अचानक नोट बंद कर देने की वजह से ये समस्या हुई। अगर मंगलवार रात की बजाय दिन तक ये जानकारी मिल जाती तो रोडवेज का कैश रोक लिया जाता। इससे कंडक्टरों के पास भी फुटकर की समस्या न आती। 

ट्रेनाें एवं बसों जैसा हाल एयरपोर्ट पर भी रहा। यूं तो दिल्ली जाने वाली फ्लाइट की अधिकांश टिकटें ऑनलाइन ही होती हैं। फिर भी सीट बच जाने के बाद बहुत से यात्री एयरपोर्ट जाकर टिकट लेते हैं। बुधवार को भी ऐसा हुआ। एयरपोर्ट पर यात्रियों ने बड़े नोट देकर टिकट तो ले लिया, लेकिन फुटकर न हो पाने की वजह से वहां यात्रियों को लिखकर दे दिया गया कि वे यात्रा कर लें, बकाया पैसा बाद में आकर ले सकते हैं। 

फुटकर पैसों की किल्लत का असर बुधवार को इलाहाबाद जंक्शन पर ज्यादा ही पड़ा। रिजर्वेशन काउंटर को या फिर जनरल टिकट काउंटर। दिन भर हाथों में बड़ी नोट लिए काउंटरों पर यात्री दिखाई दिए, लेकिन असली समस्या उन यात्रियों के समक्ष आई जो ट्रेनों में सफर कर रहे थे। जेब में फुटकर पैसा न होने की वजह से यात्रियों को चाय-पानी आदि के लिए खासी परेशानी हुई। इस दौरान तमाम ट्रेनों की पैंट्रीकार के वेंडरों ने भी बड़े नोट लेने से इंकार कर दिया। इसे लेकर हावड़ा-कालका मेल में यात्रियों की वेंडरों से झड़प हो हुई। यहां वेंडर भी अड़ गए कि वे फुटकर पैसा मिलने के बाद ही खाने पीने का सामान देंगे। सुबह प्लेटफार्म नंबर 10 पर मुंबई जाने वाली ट्रेन के यात्रियों की एक वेंडर से झड़प हो गई।

यहां यात्रियों ने वेंडर पर हाथ भी उठा दिया। इससे वेंडर खासे आक्रोशित रहे। बहुत से यात्री ऐसे भी रहे जो वेंडरों से विनती करते रहे कि उनके छोटे बच्चे हैं, प्लीज पानी की बोतल दें दे। जंक्शन पर प्लेटफार्म नंबर छह पर स्थित एक स्टॉल संचालक विनय चौरसिया ने फुटकर न होने पर कई यात्रियों को पानी की बोतलें फ्री में दे दीं। वहीं दूसरी ओर फुटकर पैसों की किल्लत की वजह से बुधवार को हावड़ा से कालका जाने वाली कालका मेल के यात्रियों को खासी परेशानी हुई। इस ट्रेन की पैंट्रीकार के वेंडरों ने बुधवार को 500 और 1000 के नोट लेने से इंकार कर दिया। इससे यात्री बिफर गए। चलती ट्रेन में यात्रियों और वेंडरों की खूब बहस भी हुई। बाद में वेंडरों ने यात्रियों को खाने-पीने का सामान देने से इंकार कर दिया। कालका जैसा ही वाकया पुणे-पटना, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, मुंबई मेल आदि ट्रेनों में भी यात्रियों के साथ हुआ। 
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