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प्रयागराज : शुभम को याद कर सिहिर उठती हैं तीनों बहनें, करती रहती हैं तलाश

Sat, 06 Aug 2022 11:59 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बजरंगी की बड़ी बेटी बारह वर्षीय रेखा बताती है कि उसे शुभम की बहुत याद आती है। सोमवार को स्कूल से आने के बाद सभी घर के बाहर खेल रहे थे। शाम को वह भंडारा खाने गया था और फिर सोते हुए घर वापस आया।
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Prayagraj News : बजरंगी की तीनों बेटियां। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बजरंगी यादव की तीनों बेटिया रेखा 12, रीतू 8 व प्रीति 6 अपने भाई शुभम 10 उर्फ बड़कऊ को याद कर रात में भी सिहिर उठती हैं। वह नींद से उठकर अपने भाई की घर में तलाश करती हैं। इनके मासूम मन में रक्षाबंधन पर्व को लेकर अभी से ही एक दर्द साफ दिखाई दे रहा है। दिनभर घर के आंगन में चहकने वाली यह तीनों बहनें अब बिलकुल गुमसुम सी रहने लगी हैं। वहीं सबसे छोटा तीन साल का विपिन अबोध है लेकिन परिजनों के रोता हुए देखकर वह भी उनके लिपटकर रोने लगता है।

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बजरंगी की बड़ी बेटी बारह वर्षीय रेखा बताती है कि उसे शुभम की बहुत याद आती है। सोमवार को स्कूल से आने के बाद सभी घर के बाहर खेल रहे थे। शाम को वह भंडारा खाने गया था और फिर सोते हुए घर वापस आया। मां-बाबू ने बताया कि बड़कऊ चला गया है अब वह नहीं आएगा। तीनों मासूम बहनों की आंखे अब भी अपने भाई बडकऊ के आने की आस सजाए हुए हैं।


शुभम की मां सविता देवी ने बताया कि दिन में तो बच्चों को मन कहीं लग जाता है लेकिन रात में अचानक सभी परेशान होकर अपने भाई को तलाशने लगती हैं। सोमवार को अचानक शुभम की मौत के बाद पूरे परिवार टूट सा गया है। 

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Prayagraj News : बेटे का शव कंधे पर लादकर घर तक ले जाने वाला बजरंगी परिवार के साथ। - फोटो : अमर उजाला।
चार दिन बाद भी पुलिस नहीं दर्ज कर सकी एफआईआर
नैनी, करछना। करेंट से शुभम की मौत के मामले में चार दिन बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। बजरंगी यादव ने जेई व लाइनमैन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले में विधिक कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी थी। करछना थाने के चार्ज संभाल रहे एसआई राजकुमार त्रिपाठी ने बताया अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।


सरकारी सुविधाओं के लिए भटक रहे और भी बजरंगी
रामपुर उपरहार गांव में बजरंगी यादव अकेले नहीं है जो केंद्र व प्रदेश सरकारी की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं पा सके। उनके अलावा अन्य कई है जो पात्र होते हुए भी सरकारी सुविधाओं से आज तक वंचित है।


गांव के रमेश निषाद मजदूरी करते थे लेकिन अब आंख की रोशनी कम हो गई है। इसलिए मजदूरी नहीं कर पाते। वह गांव के ही खुले में अपना बसेरा बनाए हुए हैं। न तो उनके पास आवास है न राशन कार्ड। वहीं गांव की सरोजा देवी का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्रों की सूची में शामिल लेकिन लाभ नहीं मिल सका। मजदूरी करने वाली सरोजा देवी अपने कच्चे मकान में परिवार के साथ जीवन व्यापन कर रही हैं। सरोजा ने बताया कि राशन कार्ड मिला है लेकिन कई बार आवेदन के बावजूद वह अन्य सुविधाओं से वंचित हैं। 
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