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Prayagraj News: भक्ति की राह में मजहब नहीं दीवार, चुनरी रंगता है मुस्लिम परिवार

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यहां धर्म की दीवारें मायने नहीं रखतीं, यहां मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से मां दुर्गा के लिए चुनरी और वस्त्र तैयार करते आ रहे हैं। शारदीय नवरात्र से पहले से ही लालगोपालगंज के खानजहानपुर, अहलादगंज, इब्राहिमपुर मोहल्ला में चुनरी बनाने का कार्य आरंभ हो जाता है। इन कारीगरों के हाथों से निकली चुनरी जब पूजा की थालियों और मंदिरों में सजती हैं तो वह केवल वस्त्र नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान बन जाती है।
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लालगोपालगंज का मुस्लिम परिवार कई पीढ़ियों से चुनरी बना रहा है। नवरात्र के दिनों में पूरा इलाका एक छोटे-से उद्योग जैसा नजर आता है। महिलाएं रंग-बिरंगे कपड़ों में गोटा-पत्ती का काम करती हैं तो पुरुष चुनरी रंग भरने के साथ पैकिंग में व्यस्त रहते हैं। सुबह से देर रात तक चलने वाले इस काम में न सिर्फ परिवार के लोग बल्कि आसपास के कई मोहल्ले के युवक-युवतियां लगे रहते हैं।
करीब दो सौ से अधिक परिवार इस काम से सीधे जुड़े हुए हैं। इनकी मेहनत से तैयार चुनरी प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, समेत प्रदेशभर में व मध्यप्रदेश के विंध्याचल, मैहर समेत कोलकाता, ओडिशा तक जाती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां का हर कारीगर इस काम को केवल रोजगार नहीं बल्कि सेवा भाव से जुड़ा मानता है।
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बोले लोग

यह काम हमारे पीढ़ियों से चला आ रहा है। हम इसे सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि सेवा मानते हैं। नवरात्र में चुनरी की मांग बढ़ जाती है, लखनऊ और वाराणसी तक सप्लाई होती है। नफीस अहमद चुनरी व्यापारी लालगोपालगंज




लालगोपालगंज की परंपरा वाकई अद्भुत है। मुस्लिम परिवार माता की चुनरी तैयार करते हैं और पूरे देश में भाईचारा और इंसानियत का पैगाम देते हैं। - प्रदीप केसरवानी पूर्व चेयरमैन, लालगोपालगंज




यहां के सैकड़ों परिवार इसी काम से अपनी आजीविका चला रहे हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसे कारीगरों को विशेष योजनाओं से मदद दी जाए ताकि यह परंपरा पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके। मुख्तार अहमद पूर्व चेयरमैन पगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि

लालगोपालगंज




यह हमारे नगर का गौरव है। जब लालगोपालगंज की चुनरी पूरे प्रदेश में जाती है तो हम सबको गर्व होता है। यह केवल आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक एकता की सबसे बड़ी मिसाल है। जव्वार अहमद अंसारी महामंत्री व्यापार मंडल लालगोपालगंज
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