याची का कहना है कि प्रशासन जिस जमीन को जबरन खाली कर रहा है, वह सत्संग सभा के नाम से ही है। प्रशासन ने मनमाने तरीके से न सिर्फ बुलडोजर चलाया, बल्कि सत्संगियों पर लाठीचार्ज भी किया। याचिका में 1935 से 2012 तक हुए सभी एग्रीमेंट , लीज डीड व आदेशों की कॉपी लगाई गई थी। इसके साथ 19 सितंबर 2023 को तहसीलदार के नोटिस का जबाब व संबंधित भूखंडों के राजस्व रिकॉर्ड को भी याचिका में शामिल किया गया था। सरकार की ओर से भी खसरा खतौनी के अलावा अन्य राजस्व रिकॉर्ड और दो दर्जन से ज्यादा पेजों के जवाब के साथ पुलिस के साथ हुई मारपीट के फोटोग्राफ भी लगाए गए थे।
गौरतलब है कि जमीन खाली कराने के दौरान सत्संगियों की तरफ से पथराव किया गया था, जबकि पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज में 50 के करीब सत्संगी घायल हुए। पथराव में कई पुलिस वालों को भी चोटें आईं थीं। याची की ओर से मांग की गई थी कि खासपुर और जगन्नाथपुर में खसरा नंबर 297/473, 309, 310, 311, 273 की भूमि उसकी है। जिला प्रशासन ने उसे सुने बिना एकतरफा आदेश पारित कर दिया। जबकि, उसकी ओर से जवाब देने के लिए समय की मांग की गई थी। लेकिन, प्रशासन ने समय नहीं दिया, जो नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। कोर्ट ने भी याची के इस तर्क को सही माना और इसी आधार पर उसकी याचिक को स्वीकार करते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश को रद्द कर दिया और याची के प्रत्यावेदन पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।