सरकार के आदेश को अभ्यर्थियों ने दी थी चुनौती
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पाया कि पुलिस भर्ती बोर्ड ने अभ्यर्थियों की परीक्षा के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो का विश्लेषण कर यह अनुमान लगाया था कि कुछ अभ्यर्थियों ने बहुत ही कम समय में प्रश्न पत्र हल कर लिया था। इसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को मनगढ़ंत और अनुमान पर आधारित मानते हुए कहा कि उम्मीदवारों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सैकड़ों अभ्यर्थियों पर दर्ज कराई गई एफआईआर, भेजे गए जेल
न्यायालय ने अधिकारियों के आचरण को "अत्यधिक गैर-जिम्मेदाराना" और "सरकारी कर्मचारी के लिए अशोभनीय" बताया। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला उन सभी उम्मीदवारों पर लागू होगा जिनकी उम्मीदवारी इसी तरह के आरोपों के आधार पर रद्द की गई थी, भले ही उन्होंने याचिका दायर न की हो। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि परीक्षा पूरी होने के एक महीने के भीतर परिणाम घोषित किए जाएं और चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।
इन जिलों के अभ्यर्थियों ने दाखिल की थी याचिका
मेरठ, बरेली, फिरोजाबाद, आगरा, गोरखपुर, गौतमबुद्धनगर, कानपुर नगर, वाराणसी, मुजफ्फरनगर, झांसी, मिर्जापुर, बस्ती, अलीगढ़, फतेहपुर एवं प्रयागराज के सैकड़ों दरोगा पद के अभ्यर्थियों ने दाखिल की थी यचिका।